फर्रुखाबाद। जनपद की सभी तीनों तहसीलों में लेखपाल व कानूनगो चार-चार निजी सहयोगी के नाम पर दलाल पाले हैं। इन्हीं के माध्यम से यह रिश्वत वसूलते हैं। इसके बाद ही लेखपाल व कानूनगो किसी कागज पर कलम चलाते हैं। इससे आम आदमी त्रस्त है। जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस खेल को जानने के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लगा रहे हैं। इससे इस खेल में उनके शामिल होने की बू आ रही है।
आपने यदि आय, जाति या मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है तो आपके पास संबंधित लेखपाल के निजी सहयोगी मतलब दलाल का फोन आना तय है। वह आवेदक के बारे में पहले जानकारी करता है। उसके बाद उससे मिलने के लिए कहता है जो आवेदक मिलता नहीं है या किसी अन्य माध्यम से लेखपाल तक रिश्वत नहीं पहुंचाता है तो उसके आवेदन को किसी न किसी बहाने निरस्त कर दिया जाता है। इसके बाद उसे दोबारा आवेदन करना पड़ता है। बिना किसी उचित कारण के आवेदन निरस्त होने की शिकायत तहसीलदार से करो या एसडीएम से पर किसी लेखपाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। इससे यह लेखपाल व कानूनगो को किसी का खौफ नहीं है। इतना ही नहीं यह पैमाइश कराने या खतौनी लेने आदि के नाम पर भी किसानों से मनमानी रिश्वत भी अपने निजी सहयोगी के नाम पर पाले दलालों के माध्यम से ही वसूलते हैं। जिस लेखपाल के पास जितने के अधिक गांवों की जिम्मेदारी है उसके पास उतने ही अधिक दलाल पले हैं। यही दलाल शाम को लेखपाल के लिए पार्टी की व्यवस्था भी कराते हैं।