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Farrukhabad News: कल्पवासियों ने पुण्य की डुबकी लगा नम आंखों से ली मइया से विदाई

Thu, 13 Feb 2025 11:01 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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एक दूसरे से गले मिलकर मेला से विदा लेतीं कल्पवासी महिलाएं। - फोटो : एक दूसरे से गले मिलकर मेला से विदा लेतीं कल्पवासी महिलाएं।
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फर्रुखाबाद। कल्पवासी व साधु संतों ने गुरुवार को पुण्य की डुबकी लगाकर पतित पावनी मां गंगा से अगले वर्ष आने की अनुमति लेकर नम आंखों से विदाई ली। राउटी व सामान वाहनों में भर अपने घर के लिए रवाना हुए। वहीं मेला क्षेत्र में गंगा तट पर हजारों टन गंदगी भी छोड़ गए। कल्पवासियों के जाने से आस्था की नगरी फिर वीरान होने लगी। मेले के अंतिम दिन लोगों ने बाजार से जमकर खरीदारी करने के साथ मनोरंजन क्षेत्र झूले का आनंद लिया।
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पांचालघाट गंगा तट पर बसी आस्था की नगरी मेला रामनगरिया में माघ के महीने में पुण्य की धारा बहती रही। माघ पूर्णिमा स्नानार्थियों की भारी भीड़ से बुधवार को कुंभ का नजारा दिखा। वहीं गुरुवार को एक माह से कल्पवास कर रहे श्रद्धालु भाेर होते ही पतित पावनी में पुण्य की डुबकी लगाने के बाद दान-पुण्य किया। इसके बाद घर वापस जाने की तैयारी में जुट गए।
गंगा तट पर बसी आस्था की नगरी में राउटी उखड़ते ही रौनक छिनने लगी। भोलेपुर हनुमान मंदिर के महंत मोहन दास ने कहा कि माघ के पवित्र महीने में गंगा स्नान करने से सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। माघ में सभी देवता तीर्थराज प्रयाग के लिए गंगा किनारे से होकर जाते हैं। इससे कल्पवासियों को देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। स्वामी सत्यस्वरूप महाराज ने अपने भक्तों से कहा कि एक माह मां गंगा की गोद में रहकर जो पुण्य किया है, उसे व्यर्थ में मत जाने देना। उन्होंने मिल-जुल कर रहने की सलाह दी।
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कल्पवासी बोले, अब घर में भी अच्छा नहीं लगेगा
जनपद हरदोई के गांव लमकन निवासी विटाना देवी, बरौली की कांती, मीना सिंह, रूबी सिंह, भोलेपुर की शकुंतला देवी, छोटी बिटिया का कहना है कि कल्पवास के दौरान बहुत सुकून मिला। घर जाने का मन नहीं करता। एक माह चिंताओं से मुक्त रहे। अब घर जाने के बाद फिर माया-मोह में फंसना है। कुछ दिन घर में भी अच्छा नहीं लगेगा।
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पुल पर जाम की स्थिति से रेंगते रहे वाहन
एक माह तक गंगा स्नान करने के बाद कल्पवासी अपने वाहनों से घर जाने लगे। इससे जमापुर से मसेनी तक जाम की स्थित रही। पूरे दिन वाहन रेंगते रहे। जाम से बचने के लिए ई-रिक्शा पैंटून पुल से होकर निकलते रहे। इससे मेला देखने आने वालों को परेशानी हुई।


समापन व संत सम्मेलन चढ़ा राजनीति की भेंट
मेला रामनगरिया में राजनीति हावी रही। नेताओं व अधिकारियों ने अपने मन पसंदीदा कार्यक्रम कराए। रामायण में लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले सुनील लहरी के कार्यक्रम में करीब 17 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए। नौ फरवरी को संत सम्मेलन व 10 फरवरी को पत्रकार सम्मेलन व 13 फरवरी को मेला समापन होना था। अधिकारियों की अनदेखी के चलते मेला प्रशासन ने समापन कार्यक्रम भी नहीं कराया। बरगदिया घाट के महंत विष्णुदास ने कहा है कि मेला प्रशासन को संत सम्मेलन कराना चाहिए था। इससे संतों की गरिमा बनी रहे। बाबा बालक दास के नेतृत्व में हर साल सम्मेलन होता था। दो साल से संत सम्मेलन नहीं हो रहा है। जगदीश दास, रामजी मौनी बाबा नारायण दास, रामजीत त्यागी का कहना है कि वर्षों से चली आ रही संत सम्मेलन की परंपरा बंद हो गई। संतों को एकजुट रहना चाहिए।
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