मौसम में अचानक आए बदलाव के बाद गुरुवार रात भर तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हुई। बिजली कड़कने से लोग खौफजदा रहे। शहर में हुए जलभराव से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खेतों में जलभराव से आलू की फसल को खासा नुकसान पहुंचा। सरसों, मसूर आदि की फसलें तेज हवा में जमीन पर बिछ गईं। बेमौसम की बारिश किसानों के लिए बर्बादी बन गई।
बारिश से आलू, गेहूं व सरसों की फसल में पानी भर गया है। इससे इनमें नुकसान होना तय है। सरसों की फसल बिछ गई है। गेहूं लिए बारिश का पानी अमृत के समान है। अमृतपुर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के किसान जितेंद्र सिंह, रामनरेश मिश्रा का कहना है कि यह बरसात से आलू की फसल के लिए नुकसानदायक है।
इससे आलू की फसल में रोग लगने की आशंका है। इस रोग से आलू की डंडी काली पड़ जाती है जिसे झुलसा रोग भी कहा जाता है। किसानों का कहना है कि आलू के खेतों में पानी भरने से इस रोग का खतरा बढ़ गया है। समय पर इस रोग की रोकथाम के लिए प्रयास नहीं किए गए तो आलू का ज्यादा नुकसान होगा।
किसानों का कहना है कि अभी गेहूं की फसल की बुवाई भी हो रही है। जिन खेतों में गेहूं जम चुके हैं उनके लिए ये बरसात अमृत के समान है। जिन्होंने बुवाई अभी की है उनके लिए यह बरसात नुकसानदायक है।
अधिकांश स्कूलों में हो गई छुट्टी
रात को शुरू हुई बारिश शुक्रवार सुबह तक होती रही। इसके चलते अधिकांश परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या न के समान रही। लिहाजा शिक्षकों ने स्कूलों में अवकाश कर दिया। कई स्कूलों में शिक्षक भी नहीं पहुंचे। निजी स्कूलों में भी वही बच्चे पहुंच सके, जो वाहनों से आते हैं।
दिन में शहर में बूंदाबांदी होती रही। इससे लोगों को छाता लेकर निकलना पड़ा। पूरे दिन घने बादल छाए रहे। इससे बाजार में दुकानें भी कम खुलीं। शहर के मोहल्ला मदरावाड़ी, आईटीआई रोड राहित विभिन्न स्थानों पर जलभराव होने से लोगों को खासी दिक्कत उठानी पड़ी।
जीआरपी बैरक के बाहर जलभराव
जीआरपी बैरक के बाहर जलभराव हो गया जबकि अभी जल्दी में ही फर्श बनवाई गई थी। बावजूद इसके इतनी नीची बना दी गई कि उसका पानी तक नहीं निकल पा रहा है। इससे पुलिस कर्मियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
नवाबगंज में दिन भी मूसलाधार बारिश
क्षेत्र रात के बाद दिन भी मूसलाधार बारिश होने से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। काम पर जाने वाले लोग अपने घरों से देरी से निकल सके। वहीं आलू किसान खासे चिंतित रहे। उन्हें आलू की फसल की बर्बादी का डर सता रहा है। खेतों में फसलों में पानी भर गया है।