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फर्जीवाड़े में लिपिक से एक्सईएन तक के शामिल होने की आशंका

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फर्रुखाबाद। फर्जीवाड़ा करके एक भार नंबर दो नलकूप कनेक्शन जारी होने के मामले में लिपिक से लेकर एक्सईएन तक के शामिल होने की आशंका जताई गई है। अधीक्षण अभियंता ने फर्जीवाड़े की विस्तृत जांच के लिए एमडी व मुख्य अभियंता को आख्या भेजी है।
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गांव रुखैया निवासी मुन्नालाल ने वर्ष 2017-18 में नलकूप के बिजली कनेक्शन कराने के लिए विद्युत वितरण निगम ग्रामीण खंड कार्यालय में आवेदन किया था। उनके आवेदन पर भार मंजूर कर एनएस-467 नंबर दर्ज किया गया था। इसी वर्ष नवाबगंज के गांव हरदुआ निवासी राजवीर ने भी नलकूप कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इनके आवेदन पर भार मंजूर कर एनएस-975 नंबर दर्ज हुआ था।
मुन्नालाल ने इस्टीमेट का पैसा विभाग में जमा किया, जबकि राजवीर से 1.10 लाख रुपये विभागीय कर्मचारी ने लेकर उसको फर्जी तरीके से सामग्री उठाने के लिए लाइन आर्डर पर एनएस-467 डालकर जारी कर दिया। इसके बाद भंडार गृह से विद्युत लाइन बनाने के लिए सामग्री का उठान हुआ और नलकूप कनेक्शन चालू कर दिया गया।
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मुन्नालाल का लाइन आर्डर खंड कार्यालय से जारी नहीं हुआ। इसके बावजूद उसने भी विद्युत लाइन बनवा कर नलकूप चालू कर लिया। इस मामले की दो सदस्यीय कमेटी ने जांच की थी। इसमें राजवीर का कनेक्शन फर्जी बता दिया गया था।
अब इस फर्जीवाड़े की विस्तृत जांच के लिए अधीक्षण अभियंता ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी व कानपुर मंडल के मुख्य अभियंता को अपनी आख्या भेजी है। इसमें शुरूआती जांच का जिक्र किया गया है, जिसमें फर्जीवाड़े के समय तैनात रहे खंड कार्यालय के लिपिक, जेई, एसडीओ, एक्सईएन व भंडार गृह के अधिकारी और कर्मचारियों के शामिल होने की आशंका जताई गई है।
अधीक्षण अभियंता एसके श्रीवास्तव ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2017-18 में हुआ था। उस समय तैनात रहे अधिकारी व कर्मचारी कहा हैं, इसकी जानकारी नहीं है। इससे प्रकरण की विस्तार से जांच कराने के लिए उच्चाधिकारियों को आख्या भेज दी गई है।
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