कोराना वायरस से निपटने को स्वास्थ्य विभाग सभी जरूरी उपाय होने का दावा तो कर रहा है लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आइसोलेशन वार्ड बनना तो दूर, जरूरी सुविधाएं तक नहीं हैं।
जांच के समय चिकित्सक द्वारा पहनी जाने वाली किट, एन-95 मास्क व हैंड सैनिटाइजर भी यहां नहीं हैं। खांसी का सीरप खत्म हुए अर्सा हो गया है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज में आइसोलेशन वार्ड मंगलवार को भी स्थापित नहीं हो सका। अस्पताल की छत पर आइसोलेशन वार्ड बनाया जाना है।
अब तक सीएचसी पर दो मरीज एंबुलेंस से ऐसे आए, जिन्होंने खुद को कोरोना की आशंका जताई। डॉक्टर ने उन्हें सीधे लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि वे संक्रमित नहीं पाए गए। दरअसल 2लेयर, 3 लेयर, सर्जिकल व एन-95 में से कोरोना मरीज को देखने के लिए एन-95 मास्क ही सुरक्षित है।
सीएचसी ये नहीं है। और तो और हैंड सैनिटाइजर भी नहीं है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि कोरोना के मरीज से एक मीटर दूर रहने के लिए कहा जाता है लेकिन जांच तो पास जाकर ही करनी होगी।
स्वास्थ्य कर्मचारी इसके लिए प्रशिक्षित भी नहीं हैं। शरीर को कवर करने वाली किट भी नहीं है। खासी कोरोना का प्राथमिक लक्षण है, लेकिन अस्पताल में खांसी का सीरप ही नहीं है।
खांसी के मरीजों की संख्या इन दिनों करीब 10 प्रतिशत बढ़ी हुई है। समय सीएचसी पर दर्द दूर करने ट्यूब, खुजली की दवा नहीं है। कुत्ता काटने वाले व्यक्तियों को लगाए जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन एक सप्ताह से नहीं उपलब्ध है।