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Farrukhabad News: फिल्म देने के बजाय मोबाइल से क्लिक कराई जा रही एक्सरे की फोटो

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फोटो-24 ओपीडी में मरीज देखते प्रशिक्षु आयुष डॉ.यासिर। संवाद
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फर्रुखाबाद। शहर का सिविल अस्पताल लिंजीगंज बुधवार को इंटर्नशिप छात्रों के सहारे चलता मिला। पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी व दवा वितरण की जिम्मेदारी इंटर्नशिप छात्र ही संभालते दिखे। अस्पताल में तीन एक्सरे मशीनों में दो खराब रहीं, जबकि एक में फिल्म के बजाय एक्सरे की फोटो खिंचवाई जा रही है।
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सिविल अस्पताल लिंजीगंज का भवन भले ही बड़ा है लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं बौनी दिखीं। सुबह 10:25 बजे पर्चा काउंटर पर भीड़ लगी थी। कक्ष में तीन प्रशिक्षु फार्मासिस्ट पर्चा बनाते मिले। इसके आगे वाले कक्ष में प्रशिक्षण ले रहे आयुष डॉ. यासिर मरीज देख रहे थे। दवा वितरण कक्ष में भी तीन इंटर्न छात्राएं व एक छात्र मरीजों को दवा दे रहा था। कक्ष में एक भी फार्मासिस्ट नहीं था। पास के ही कमरे में चीफ फार्मासिस्ट दिनेश कुमार अकेले बैठे मिले। उन्होंने बताया कि चार फार्मासिस्टों की तैनाती है। फार्मासिस्ट पारितोष अवस्थी की रात में व अपर्णा यादव की शाम को ड्यूटी होने से वह नहीं आए।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राणाप्रताप अपने कक्ष में मरीज देख रहे थे। उन्होंने बताया कि डॉ. ममता अरुण की तीन दिन राजेपुर सीएचसी में ड्यूटी रहती है, जबकि तीन दिन यहां। राजेपुर में ड्यूटी करने से वह अस्पताल में नहीं हैं। डॉ. विजय सिंह ने रात में ड्यूटी की, इससे दिन में उनका ऑफ है। डॉ. ऋषिनाथ गुप्ता स्वास्थ्य शिविर के सिलसिले में सीएमओ कार्यालय गए हैं। आयुष डॉ. नवनीत गुप्ता ही ओपीडी में मरीज देख रहे हैं। एक्सरे कक्ष में टेक्नीशियन सुंदरम शुक्ला मौजूद मिलीं। उनके साथ छह इंटर्नशिप करने वाली एएनएम छात्राएं थीं। उन्होंने बताया कि तीन एक्सरे मशीन हैं। एक मशीन काफी पुरानी होने से कंडम हो चुकी है। एक एक्सरे मशीन में करंट आने से उसे चलाया नहीं जाता। बीपीएल एक्सरे मशीन से प्रतिदिन करीब 15 एक्सरे किए जाते हैं। स्टॉक में मात्र 30 फिल्म ही रखी हैं। इससे गरीबों का एक्सरे करने पर ही फिल्म दी जाती है। अन्य मरीजों को एक्सरे करने के बाद स्क्रीन की मोबाइल से फोटो खिंचवा दी जाती है। महिला वार्ड में एक भी प्रसूता भर्ती नहीं थी। हालांकि, अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं बताई गई।
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डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़े
अस्पताल के वार्ड में पांच मरीज भर्ती थे। उनको ग्लूकोज चढ़ाई जा रही थी। वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि सभी मरीज डिहाइड्रेशन के हैं। प्रतिदिन आठ से 10 मरीज भर्ती होते हैं। अधिकांश को दस्त व पेट संबंधी समस्या है। दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने से मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है।

वार्डों में धूल फांक रहे बेड व उपकरण
अस्पताल के पीछे 20-20 बेड के दो वार्ड बने हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व बने इन वार्डों में एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया। जबकि दोनों वार्डों में नए बेड पड़े होने के साथ अन्य कई उपकरण व सामग्री भरी गई है। इससे यह वार्ड स्टोर के रूप में उपयोग होते दिख रहे हैं।

प्रतिदिन 200 से अधिक पहुंचते हैं मरीज


अस्पताल अधीक्षक डॉ. राणाप्रताप ने बताया कि प्रतिदिन करीब 200 मरीज आते हैं। डिहाइड्रेशन के मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इंंटर्न छात्रों को सिखाने के लिए काम लिया जाता है। दवा वितरण कक्ष में फार्मासिस्ट की निगरानी रहती है। स्टाफ कम होने से अतिरिक्त वार्डों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। प्रशिक्षु डॉक्टर निशुल्क सेवा दे रहे हैं।

फोटो-24 ओपीडी में मरीज देखते प्रशिक्षु आयुष डॉ.यासिर। संवाद

फोटो-24 ओपीडी में मरीज देखते प्रशिक्षु आयुष डॉ.यासिर। संवाद

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