फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के दौरान आठ माह के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। बच्चे के चौकीदार पिता ने अस्पताल के गेट पर जमकर हंगामा किया और इलाज के लिए पांच हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया। हालांकि, मौके पर पहुंचे दरोगा ने पिता को नशे में होने की बात कहकर शांत कराया और रेफर के बावजूद बच्चे को न ले जाने पर फटकार भी लगाई।
नवाबगंज थाने के गांव सिकंदरपुर नहरोसा निवासी चौकीदार भंवरपाल खटिक और उनकी पत्नी बबली शुक्रवार शाम 3.48 बजे अपने आठ माह के बेटे हंसराज उर्फ रुद्राक्ष को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे थे। बच्चा निजी अस्पताल से बेहोशी की गंभीर हालत में लाया गया था। डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया और परिजनों को बच्चे को बड़े अस्पताल में रेफर करने की जानकारी दी। करीब दस मिनट बाद ही बच्चे को रेफर कर दिया गया, जिसके बाद पिता भंवरपाल अस्पताल से बाहर चले गए। बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई और शाम साढ़े चार बजे के बाद उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद चौकीदार ने अस्पताल के गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। मां बबली और बुआ नेमा ने भी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया। चौकीदार ने आरोप लगाया कि पांच हजार रुपये न देने पर बच्चे का इलाज नहीं किया गया।
हंगामे की सूचना पर कादरीगेट थाने के दरोगा मुनीर खान पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने चौकीदार से नशे में होने की बात कही, जिस पर वह शांत हो गया। दरोगा ने चौकीदार को रेफर के बावजूद बच्चे को बड़े अस्पताल न ले जाने के लिए फटकार भी लगाई। इमरजेंसी प्रभारी डॉ. अभिषेक चतुर्वेदी ने बताया कि बच्चा निजी अस्पताल से गंभीर हालत में लाया गया था।