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एक डॉक्टर, 535 मरीज, कैसे मिले इलाज

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फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल में व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। दो दिन बाद खुली ओपीडी में एक डॉक्टर ही बैठे नजर आए। इससे मरीजों को खासी दिक्कत उठानी पड़ी। कई मरीज तो बिना दवा के ही वापस हो गए।
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डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में सोमवार को ओपीडी में 535 मरीज पहुंचे, मगर डॉक्टर के नाम पर वरिष्ठ फिजीशियन अशोक कुमार ही थे। आर्थो के डॉ. योगेंद्र मिश्र राउंड पर थे और डॉ. वीके दुबे सीएमएस का जिम्मा होने कुछ देर ही मरीज देख सके। आंख रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार और डॉ. रिषिकांत वर्मा की फतेहगढ़ दिव्यांग बोर्ड में ड्यूटी थी।
हृदय रोग विशेष डॉ. मनोज पांडेय की इमरजेंसी में ड्यूटी होने से वह भी ओपीडी में नहीं बैठे। इसके अलावा सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा अवकाश पर और डॉ. इमरान अली ऑपरेशन रूम में बताए गए। स्थितियां चाहे जो भी रहीं हों, मगर दो दिन के कोरोना कर्फ्यू के बाद दवा की आस में दूरदराज से पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तमाम मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए ही लौट गए।
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शाहजहांपुर जिले के थाना अल्हागंज के गांव बिचोला निवासी जमादार (47) के काफी दिनों से घाव था। वह सर्जन को दिखाने परिवार के साथ ओपीडी में सुबह 9 बजे पहुंचा था। हालत इतनी खराब थी कि वह बैठने की स्थिति में नहीं था। पर्चा बनवाया, तो उस पर सर्जन की बजाय फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार का नाम लिख दिया
गया। भारी भीड़ होने से मरीज काफी दूर जमीन पर लेटा था। जमादार ने बताया कि जैसे-तैसे परिजन डॉक्टर के पास पहुंचा, तो उन्होंने यह केस सर्जन का बताया। सर्जन डॉ. इमरान अली ऑपरेशन रूम में थे। दोपहर 12 बजे के बाद तक इंतजार करता रहा। फिर चला गया।
पर्चा काउंटर पर सुबह से ही मरीजों की खासी भीड़ रही। महिला और पुरुष के अलग-अलग काउंटर थे। सुबह 11 बजे के करीब महिलाओं की लाइन में कुछ युवतियां आगे लगकर पर्चा बनवाने का प्रयास करने लगीं, तो लाइन में खड़ी महिलाओं ने शोर कर दिया। कुछ ही देर में विवाद बढ़ा, तो धक्का-मुक्की होने लगी। ओपीडी में बैठे कुछ स्वास्थ्य कर्मियों और सुरक्षा कर्मियों ने बमुश्किल लोगों को समझाया।
कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए पंजीकरण काउंटर पर लोगों की लाइनें लगी रहीं। भीड़ जब बढ़ी, तो ओपीडी पर्चा काउंटर के कर्मचारी ने भी पंजीकरण शुरू कर दिए। इस पर तमाम लोग अंदर घुस गए। इससे काफी अव्यवस्था बनी रही। पंजीकरण कराने में लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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‘सोमवार को मरीजों की संख्या अधिक होती है। दो डॉक्टरों की ड्यूटी दिव्यांग बोर्ड में लग जाती है। इमरजेंसी और मेडिकोलीगल का काम भी जरूरी है। हालांकि डॉ. योगेंद्र मिश्र और मैने भी मरीजों को देखा था। दोपहर दो बजे तक सभी मरीजों को दवा दिलवाई गई।’
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-डॉ. वीके दुबे, प्रभारी सीएमएस/हड्डी रोग विशेषज्ञ
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