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Farrukhabad News: 2016 में अर्पित सिंह सहित छह एक्सरे-टेक्नीशियन हुए थे तैनात

Thu, 04 Sep 2025 11:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग को वर्ष 2016 में छह एक्सरे टेक्नीशियन मिले थे। इनमें टेक्नीशियन अर्पित सिंह भी शामिल थे। उसी जन्मतिथि वाले प्रदेश में पांच अर्पित सिंह की उसी दौरान तैनाती होने से फर्जी नियुक्ति की चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। असली और फर्जी नियुक्ति पर नौ वर्ष से विभाग आंखें मूंदे है।
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स्वास्थ्य विभाग में फर्जी नियुक्ति के मामले कई बार सामने आ चुके हैं। अब एक्सरे टेक्नीशियन अर्पित सिंह की फर्जी नियुक्ति होने की चर्चाएं तेज हैं। हुआ यूं कि मई 2016 में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से 403 एक्सरे टेक्नीशियन चयनित हुए। बताया जा रहा है कि इन चयनित अभ्यर्थियों में एक ही अर्पित सिंह के नाम की नियुक्ति हुई। मानव संपदा पोर्टल पर अर्पित सिंह के नाम से छह एक्सरे टेक्नीशियन अंकित हैं।
सभी के पिता का नाम अनिल सिंह, जन्म तिथि 12 जून 1989 है। इनमें चार अर्पित सिंह का पता सी 22 प्रताप नगर शाहगंज आगरा है, जबकि दो का पता अलग है। इनमें एक एक्सरे टेक्नीशियन अर्पित की तैनाती सीएचसी शमसाबाद में दिखाई जा रही है। हालांकि 2016 में जनपद में छह एक्सरे टेक्नीशियन तैनात हुए थे। इनमें कपिल वर्मा, प्रदीप यादव, भगवती शरण कुशवाहा, विजय शंकर तिवारी, रमेश कुमार व अर्पित सिंह शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक अन्य एक्सरे टेक्नीशियन की तैनाती के करीब 15 दिन बाद अर्पित सिंह की जिले में तैनाती हुई थी।
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सबसे पहले उसे सीएचसी शमसाबाद में ही तैनात किया गया था। इसके बाद उन्हें सीएचसी मोहम्मदाबाद भेजा गया। फिर वहां से सीएचसी शमसाबाद वापस किया गया। पिछले सप्ताह अर्पित सिंह का दोबारा स्थानांतरण सीएचसी मोहम्मदाबाद कर दिया गया। मामले में अर्पित सिंह के मोबाइल पर कई बार संपर्क किया गया, लेकिन काल रिसीव न होने से बात नहीं हो सकी।
सूत्रों की मानें तो अर्पित सिंह जनपद एटा के निवासी हैं। अब सवाल यह उठता है कि एक ही नाम से छह अर्पित सिंह की जनपद शामली, रामपुर, बांदा, बलरामपुर, बदायूं व फर्रुखाबाद में तैनाती है। इससे असली नियुक्ति किसकी हुई और पांच फर्जी नियुक्ति में कौन-कौन शामिल है, यह बड़ा सवाल है। स्वास्थ्य विभाग लगातार सभी को वेतन दे रहा है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। जबकि नियुक्ति के बाद विभाग अभ्यर्थी का पुलिस सत्यापन भी कराता है। सत्यापन में भी फर्जीवाड़ा खुलकर सामने नहीं आ सका।
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