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कोरोना संकट में भी आईजी अपनी गोद ली बेटी को नहीं भूले

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अपनी बुआ वेदवती की गोद में बैठी गौरी। - फोटो : FARRUKHABAD
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कोरोना संकट में भी गौरी को नहीं भूले आईजी
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फर्रुखाबाद। कोरोना संकट की व्यस्तता में भी आईजी अपनी गोद ली हुई बेटी को नहीं भूले हैं। वे पांच हजार रुपये प्रति माह उसकी बुआ व उसके संयुक्त बैंक खाते में भेज रहे हैं। राशन व कपड़ों की समस्या न हो, इसका ध्यान मोहम्मदाबाद कोतवाल रखते हैं। गौरी भी बुआ को ही मां कहती है। वह अपने बुआ के बेटों व बेटी के साथ खुश नजर आती है।
मोहम्मदाबाद कोतवाली के गांव करथिया में 23 बच्चों को गांव के सुभाष ने बंधक बना लिया था।पुलिस मुठभेड़ में 30 जनवरी को सुभाष मारा गया था। उसकी पत्नी रूबी की भीड़ ने हत्या कर दी थी। बच्चे छुड़ा लिए गए थेे। सुभाष व रूबी की डेढ़ वर्ष की बेटी गौरी को कानपुर जोन के आईजी आईजी मोहित अग्रवाल ने गोद ले लिया था।
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उन्होंने उसका भरण पोषण करने के साथ पढ़ा लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा करने की बात कही थी। इसके बाद गौरी को मोहम्मदाबाद कोतवाली में तैनात महिला सिपाही रजनी ने अपने पास रख लिया था। आईजी उस दौरान भी हर महीने रुपये भेजते रहे। 15 मार्च को मोहल्ला कछियाना निवासी सुभाष बहन वेदवती ने गौरी को गोद ले लिया था।
आईजी जोन को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने वेदवती व गौरी का बैंक में संयुक्त खाता खुलवाने का आदेश दिया। खाता खुलने के बाद आईजी अपने वेतन से हर महीने पांच हजार रुपये खाते में डाल रहे हैं। वेदवती के पति अजय कुमार दिल्ली में रसोइया हैं। वे लॉकउाउन में भी दिल्ली में ही हैं।
वेदवती अपने बेटी इशू, पुत्र अंशुल, आशू के साथ बड़े प्यार से गौरी का लालन पालन कर रही हैं। वह अपनी मां को भूल चुकी है। वेदवती को मां बुलाती है। वेदवती ने बताया कि आईजी जोन मोहित अग्रवाल हर महीने उसके व गौरी के संयुक्त खाते में पांच हजार रुपये भेज रहे हैं।
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मोहम्मदाबाद कोतवाल राकेश कुमार मोबाइल पर उसके हालचाल लेते रहते हैं। वह अप्रैल में काफी मात्रा में दाल, चावल, आटा, तेल व गौरी के लिए कपड़े दे गए थे। उन्होंने कहा है कि किसी भी चीज की आवश्यकता हो तो केवल कह देना वह चीज मुहैया करवा दी जाएगी।
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