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छपाई कारोबारियों पर बोर्ड ने कसा शिकंजा

Wed, 11 Apr 2018 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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sewer falling in ganga river - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्रिंटिंग कारखानों का केमिकल युक्त पानी सीधे गंगा में जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती पर प्रशासन ने कारखाना मालिकों से अपने यहां एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लाट (ईटीपी) लगाना अनिवार्य कर दिया है। वहीं, उद्यमी कामन ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने की मांग कर रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि वह सीटीपी के लिए खर्च में भी भागेदारी को तैयार हैं। प्रिंट कारोबारियों का कहना है कि कई लघु उद्यमी ईटीपी का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। सीटीपी के माध्यम से ऐसे उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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शहर में छोटे-बड़े करीब 19 नाले हैं। शहर के अंगूरीबाग, अमेठी जदीद, अमेठी कोहना, कांशीराम कालोनी हैवतपुर गढ़िया, गुदड़ी, मऊदरवाजा और खटकपुरा आदि मोहल्लों में छोटे-बड़े करीब 125 प्रिंटिंग के कारखाने चल रहे हैं। टोकाघाटा और बरगदियाघाट समेत कई नालों का पानी गंगानदी में गिरता है। प्रिंटिंग कारोबारियों की मानें तो बमुश्किल 30-31 प्रिंटिंग कारोबारियों ने ही अपने कारखानों में सीटीपी


लगवा रखे हैं। छोटे उद्यमियों का तो आरोप है कि बड़े कारखानेदारों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से साठगांठ कर अमानक ईटीपी लगाए हैं। इसके चलते कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी नाले-नालियों के माध्यम से गंगानदी में गिर रहा है। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए जिले में कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट लगवाए जाने के लिए कई सामाजिक संगठन शासन से मांग करते चले आ रहे हैं। हालांकि शासन ने करोड़ों रुपये की लागत से कॉमन ट्रीटमेंट लगाए जाने की हामी तो भर दी है लेकिन अभी तक इस ओर शासन-प्रशासन ने कोई ठोस कदम आगे नहीं बढ़ाया है। गौरतलब है कि 2015 में सभी कारखानों में ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) लगवाए जाने के आदेश शासन ने दिए थे, लेकिन अभी तक बमुश्किल करीब 25 प्रतिशत कारखानों में ही शोधन संयंत्र। ऐसे में केंद्र सरकार का गंगा स्वच्छता का मिशन पूरा होता जिले में नहीं दिखाई पड़ रहा है।
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वस्त्र छपाई कुटीर उद्योग के अध्यक्ष चंद्रपाल वर्मा का कहना है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आए दिन छोटे उद्यमियों को नोटिस भेजकर ईटीपी लगाने की बात कह रहा है, जबकि छोटे उद्यमियों की मांग है कि ईटीपी की बजाए कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट लगा दिया जाए। इसमें वह लोग भी सहयोग करेंगे। इसके लिए कई बार वह उद्योग बंधु की बैठक में जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दे चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन कारखानों में ईटीपी लगे भी हैं। वह अमानक हैं। चाहें तो जिलाधिकारी इसकी जांच करा लें। उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर अमानक ईटीपी लगाए कारखानेदारों से साल में सुविधाशुल्क ले जाने का भी आरोप लगाया। (ब्यूरो)


 
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कुलदीप मिश्रा ने बताया कि कामन ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने की तैयारी चल रही है। ईटीपी कुछ कारखानों में लगवा गए थे और अन्य लोगों को लगवाने के लिए कहा गया था। वहां की स्थिति का निरीक्षण कराएंगे। इसके बाद कारखाना मालिकों से बात की जाएगी। उधर, जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त उद्योग सुरेंद्र कटियार ने बताया कि ईटीपी लगवाने की विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की जिम्मेदारी है।
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