कंपिल। पौराणिक एवं ऐतिहासिक तीर्थनगरी कंपिल के दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के समापन के बाद शनिवार को क्षमावाणी पर्व श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। जैन समाज के श्रद्धालुओं ने भगवान श्री 1008 विमलनाथ स्वामी की पूजा-अर्चना कर अभिषेक और शांतिधारा की।
क्षमावाणी पर्व पर समाज के लोगों ने एक-दूसरे से मन, वचन और कर्म से जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांगी। श्रद्धालुओं ने आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम, सौहार्द और भाईचारे के साथ रहने का संकल्प लिया। एक-दूसरे से मिलकर ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहकर क्षमा याचना की। दशलक्षण महापर्व के दस दिनों में श्रद्धालुओं ने उत्तम क्षमा समेत दस धर्मों की आराधना की। महापर्व के समापन पर आयोजित क्षमावाणी पर्व में अहिंसा, क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने कहा कि क्षमा मांगना और दूसरों को क्षमा करना आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण माध्यम है।
सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद समाज के लोगों ने एक-दूसरे से मिलकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में जैन समाज के प्रबंधक अनुराग जैन सहित समाज के लोगों ने सहयोग किया। इस दौरान अनुराग जैन, आशीष जैन, आकाश जैन, अंकुर जैन, सुरेश जैन, रूपेश जैन, सुबोध जैन, नेहा समेत जैन समाज के लोग मौजूद रहे।