बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर शनिवार को संकिसा में धम्मा लोको बुद्ध विहार प्रांगण से भंतों और बौद्ध अनुयायियों ने शोभायात्रा निकाली। बौद्ध अनुयायी हाथों में पंचशील ध्वज लेकर जयकारे लगाते हुए पवित्र स्तूप पर पहुंचे। स्तूप के चक्कर लगाने के बाद प्रवेश द्वार पर बैठ उन्होंने मोमबत्ती, अगरबत्ती जलाकर पूजन, वंदन और परित्राण पाठ किया।
युवा बौद्ध कल्याण समाज भारत की ओर से संकिसा में आयोजित बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। पूर्व मंत्री तपेंद्र प्रसाद, प्रो. शैतान सिंह शाक्य, भंते डॉ. धम्मपाल थैरो की अगुआई में धम्मा लोको बुद्ध विहार प्रांगण से भंतों ने शोभायात्रा निकाल कर बौद्ध धर्म की क्या पहचान, मानव-मानव एक समान, जब तक सूरज चांद रहेगा, बौद्ध धर्म का नाम रहेगा, घर घर दीप जलाएंगे, बौद्ध अपनाएंगे, एक, दो, तीन, चार, बौद्ध धर्म की जय-जयकार, बौद्ध धर्म की जय हो और भगवान बुद्ध की जय हो, जैसे उद्घोष गूंजते रहे।
पवित्र स्तूप पर पहुंचने के बाद पूर्जा अर्चना कर सभा का आयोजन हुआ। इसमें डा. धम्मपाल थैरो ने भगवान बुद्ध के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अवध एवं मगध में इसको वैशाखी पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। यह दिन खीर पूड़ी खाने, एक दूसरे को गले लगाने, द्वेष भावना दूर करने का होता है। कहा कि भगवान बुद्ध की अस्थियां पटना बिहार के म्यूजियम में रखी हैं।
बुद्ध पूर्णिमा के दिन अस्थियों के दर्शन के लिए म्यूजियम खोल दिया जाता है और बौद्ध अनुयायी पूजा-अर्चना करते हैं। डा. शैतान सिंह शाक्य ने कहा भगवान बुद्ध ने पंचशील एवं असमानता का सिद्धांत दिया है। आरटीओ आगरा जेएस कुशवाह ने कहा कि भगवान बुद्ध का बुद्ध पूर्णिमा को जन्म हुआ था। इसी दिन भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। पंचशील में कहा गया है कि जो हमारे प्रवचनों पर अमल करता है उसका कल्याण होता है।
पूर्व मंत्री तपेंद्र प्रसाद ने कहा कि लगभग 2500 वर्ष पूर्व शिक्षा के द्वार चंद लोगों के लिए खुला था। भगवान बुद्ध ने यह द्वार सभी के लिए खोल दिए। पंचशील अपनाने से सभी बुराइयां दूर हो जाती हैं। इस दौरान डा. सरिता शाक्य, भंते नागसेन, भंते चेतसिक बौद्ध, भिक्षु आनंदमित्र, भिक्षु करमापा आदि बौद्ध अनुयायी और भिक्षु मौजूद रहे।