फर्रुखाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को चोरी हुई मोटरसाइकिल का बीमा क्लेम देने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को परिवादी सुरेशचंद्र को 1,09,900 रुपये की बीमित धनराशि, ब्याज और मानसिक क्षति के लिए 10 हजार रुपये अदा करने को कहा है। कंपनी ने वाहन के अनधिकृत उपयोग का हवाला देकर क्लेम खारिज किया था, जिसे आयोग ने सेवा में कमी माना।
कन्नौज निवासी सुरेशचंद्र ने आयोग में अर्जी दायर कर बताया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से बीमित उनकी मोटरसाइकिल 22 मई 2017 को गुरसहायगंज में चोरी हो गई थी। उन्होंने बाइक जावेद हुसैन को बेची थी, पर आरसी ट्रांसफर न होने से वह ही पंजीकृत स्वामी बने रहे। चोरी की सूचना पुलिस और बीमा कंपनी को दी गई, जिसकी एफआईआर भी दर्ज हुई। बीमा कंपनी ने 17 नवंबर 2019 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि वाहन का उपयोग अनधिकृत व्यक्ति कर रहा था। आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्य नाजरीन बेगम और विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने माना कि घटना के समय सुरेशचंद्र ही वाहन के पंजीकृत स्वामी थे। आयोग ने कहा कि कानून के अनुसार वाहन से जुड़ी जिम्मेदारी पंजीकृत स्वामी से जुड़ी रहती है। बीमा कंपनी केवल इस आधार पर क्लेम खारिज नहीं कर सकती कि वाहन किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में था।
आयोग ने क्लेम अस्वीकार करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। कंपनी को 45 दिन में 1,09,900 रुपये बीमित धनराशि, निर्धारित 6 फीसदी वार्षिक ब्याज और 10,000 रुपये मानसिक कष्ट के लिए अदा करने का आदेश दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि तय समय सीमा में भुगतान न होने पर ब्याज दर 6 फीसदी से बढ़ाकर 8 फीसदी वार्षिक कर दी जाएगी।