आगरा और झांसी मंडल के कुछ जिलों में फसलों पर टिड्डी दल का हमला हुआ है। र्रुखाबाद में भी टिड्डी दल के हमले की आशंका है। इससे जिला कृषि रक्षा अधिकारी डा. राकेेश कुमार सिंह ने किसानों को सतर्क किया है।
उन्होंने टिड्डी दल के हमले से बचाव को सलाह भी दी है। नीम आयल की 40 मिली लीटर की मात्रा को दस ग्राम कपड़े धोने के पाउडर के साथ मिलाकर टंकी में डाल कर छिड़काव करने से टिड्डी फसलों को नहीं खा पाती है।
खेत में टिड्डी के प्रकोप की दशा में इकट्ठा होकर टीन के डिब्बों, थालियों, ढोल व मजीरे बजाकर शोर मचाकर इन्हें भगा सकते हैं। टिड्डी दिन में फसल खाती और रात में अंडे देती है।
यदि किसी क्षेत्र में विशेष रूप से टिड्डी दल रात में रुक जाता है तो सुबह उस क्षेत्र की जुताई कर दी जाए। फसल की कटाई के बाद मई, जून में खेत की गहरी जुताई करने से सूर्य की तेज किरणों से भूमि में पड़े टिड्डियों एवं अन्य कीटों के अंडे व प्यूपा नष्ट हो जाते हैं।
बलुई मिट्टी टिड्डी के प्रजनन एवं अंडे देने के लिए सर्वाधिक अनुकूल होती है। इस कारण बलुई मिट्टी वाले खेतों की किसान जुताई करवा दें।