फर्रुखाबाद। प्रदेश सरकार ने 100 साल पुराने ऐतिहासिक महत्व वाले दुर्लभ वृक्षों को विरासत वृक्ष घोषित कर दिया है। शासन के निर्देश के बाद वन विभाग ने चार विरासत वृक्षों की तलाश की है। इसमें दो बरगद, एक पीपल और एक खिन्नी का वृक्ष है। सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन वृक्षों का संरक्षण करवाएगी।
वन विभाग ने जिन चार वृक्षों को सूची में शामिल किया है, उसमें शृंगीरामपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय का बरगद है। बरगद का ये वृक्ष 225 साल पुराना बताया गया है। जमीन से 1.37 मीटर ऊंचाई पर तने की मोटाई 690 सेंटीमीटर है। शहर के पटेल पार्क में खड़े बरगद व खिन्नी और संकिसा के बौद्ध स्तूप परिसर में पीपल के वृक्ष को विरासत की सूची में शामिल किया गया है।
वन विभाग ने चारों वृक्षों की रिपोर्ट फरवरी में शासन को भेजी दी है। सामाजिक वानिकी प्रभागीय निदेशक पीके उपाध्याय ने बताया कि चारों वृक्षों की जीपीएस लोकेशन भी निर्धारित की गई है। अब इन वृक्षों की देखरेख वन विभाग करेगा।
प्राचीन पेड़ों की खोजबीन जारी
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी पीके उपाध्याय ने बताया कि पेड़ों का चयन 100 साल से ऊपर और ऐतिहासिक महत्व के आधार पर किया जा रहा है। अभी चार वृक्ष सूची में शामिल किए गए हैं। अन्य वृक्षों की खोजबीन की जा रही है। और भी पेड़ मिले तो उन्हें भी सूची में शामिल किया जाएगा।
शृंगीरामपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में खड़ा बरगद
उम्र: 225 साल, तने का व्यास: 690 सेंटीमीटर
संकिसा बसंतनगर बौद्ध स्तूप परिसर में खड़ा पीपल
उम्र: 150 साल, तने का व्यास: 398 सेंटीमीटर
फर्रुखाबाद पटेल पार्क में खड़ा बरगद
उम्र: 105 साल, तने का व्यास: 652 सेंटीमीटर
फर्रुखाबाद पटेल पार्क में खड़ा खिन्नी का वृक्ष
उम्र: 122 साल, तने का व्यास: 284 सेंटीमीटर।