फर्रुखाबाद। गैंगस्टर एक्ट के आरोपी को 27 साल बाद विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट रितिका त्यागी ने दोषी ठहराया। दोषी को छह साल कारावास की सजा सुनाई गई है। 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर दोषी को दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
थाना नवाबगंज के तत्कालीन एसओ सुरेश कुमार सिंह ने 30 सितंबर 1998 को थाना शमसाबाद के गांव अद्दूपुर निवासी उमेश पुत्र बाबूराम सहित एक अन्य के खिलाफ गिरोहबंद समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें कहा था कि उमेश गैंग के सदस्यों के साथ मिलकर ग्रामीणों को डराकर अवैध तरीके से धन उगाई करता है। इनके खिलाफ गवाही देने के लिए ग्रामीण तैयार नहीं होते हैं। उमेश और गैंग के सदस्यों पर अलग-अलग थानों में दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं।
विवेचक ने विवेचना पूरी कर उमेश के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से शैलेश परमार, भानु प्रताप सिंह व राजीव कुमार ने दलीलें दीं। मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट रितिका त्यागी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी।
गवाह और साक्ष्य के आधार पर उमेश को गैंगस्टर एक्ट में दोषी ठहराया। दोषी को छह साल कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो माह अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया।