फर्रुखाबाद। राजपूत रेजिमेंट सेंटर के शताब्दी वर्ष पर आयोजित पुनर्मिलन समारोह में उप थलसेनाध्यक्ष सीपी मोहंती ने रेजीमेंट का इतिहास बताया। उन्होंने बताया कि रेजीमेंट की नींव वर्ष 1748 में कानपुर में रखी गई थी। कार्यक्रम में पूर्व थलसेनाध्यक्ष वीके सिंह भी शामिल हुए।
फतेहगढ़ स्थित राजपूत रेजिमेंट सेंटर के करियप्पा मैदान पर शताब्दी वर्ष कार्यक्रम शुरू हुआ। बुधवार को परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल, वाइस चीफ आफ आर्मी स्टाफ कर्नल आफ द राजपूत रेजिमेंट उप थलसेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती कार्यक्रम में पहुंचे।
उन्होंने सबसे पहले समारोह में उपस्थित अधिकारियों, जवानों, वीर नारियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि रेजिमेंट का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है। इसकी शुरुआत वर्ष 1748 में तीन राजपूत को कानपुर में तैयार करके हुई थी। इसका नाम 24 नेटिव इंफेंट्री रखा गया। वर्ष 1858 में लखनऊ रेजिमेंट का गठन किया गया। रेजिमेंट को लखनऊ युद्ध सम्मान से सम्मानित किया गया।
बाद में इसका नाम बदलकर 16 राजपूत कर दिया गया। वर्ष 1921 में भारतीय सशस्त्र सेनाओं के पुनर्गठन के बाद 16 राजपूत को फतेहगढ़ लाया गया और इसे प्रशिक्षण बटालियन बनाया गया। इसी करियप्पा मैदान से सदियों से मां भारती की रक्षा के लिए प्रतिवर्ष हजारों वीर सपूत सेना में शामिल होकर देश व रेजिमेंट का नाम रोशन कर रहे हैं।
समारोह में पूर्व थलसेनाध्यक्ष केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह वर्तमान व पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल भी शामिल हुए। कार्यक्रम में पाइप व ड्रम बैंड की धुन पर जवानों ने कदम से कदम मिलाकर शानदार परेड का प्रदर्शन किया। रिक्रूटों ने गोलदायरा बनाकर हथियार के साथ धमकी देने वाले दुश्मन पर प्रहार कर खात्मा करने का प्रदर्शन किया।