फोटो: 35 देवरान गढ़िया में खेत में कटे पड़े धान को गट्ठर में बांधते किसान। संवाद
- फोटो : घायल पूनम।
फार्रुखाबाद/कमालगंज। खेती-किसानी के समय में मौसम की बदलती करवट पर किसानों की नजर है। चार दिन बारिश के बाद मौसम में बदलाव आ चुका है।
तापमान गिरने के साथ ही धुंध भी छा रही है। कृषि वैज्ञानिक की मानें तो आलू की बोआई व फसल की बढ़वार के लिए यह मौसम बिलकुल मुफीद है। मौसम गेहूं बोआई के लिए भी अनुकूल है।
चार दिन की बारिश में धान किसानों का अधिक नुकसान हुआ। जिन लोगों ने परेवट कर आलू गड़ाया था या बारिश से एक-दो दिन पहले पानी लगाया। उन खेतों में आलू फसल के भी नुकसान का अंदेशा लगाया जा रहा।
कमालगंज के ककरैया निवासी उन्नतशील किसान शरद कुमार का कहना है कि यदि बारिश से पहले गाड़े गए आलू में 60 प्रतिशत भी अंकुरण हो जाता है तो कोई भी खेत जुताकर दुबारा गड़ाई नहीं करेगा।
वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि इस समय छाई धुंध की किसानों में चर्चा होना स्वाभाविक है। लेकिन इससे फसलों को कोई नुकसान नहीं है। बल्कि आलू की फसल गाड़ने के लिए और जो आलू गड़ चुका है, उसके लिए यह मौसम बहुत ही अनुकूल है।
उन्होंने बताया कि गेहूं के लिए मौसम भी बढ़िया हो गया है। खेत में पानी से परेवट किए बिना ही खेत तैयार कर गेहूं की भी बोआई की जा सकती है। 15 नवंबर तक गेहूं बोआई बढ़िया मानी जा सकती है।
उधर, बारिश के दौरान कई किसानों का धान खेतों में कटा पड़ा था। अब सूख जाने पर उसे सहेजा जा रहा है। गट्ठर बांधकर ढेर लगाया जाएगा। उसके बाद धान की थ्रेसर या चेन वाली मशीन से खंदाई का जतन होगा।