फर्रुखाबाद/अमृतपुर। मैदानों और पहाड़ों पर हो रही बरसात का असर अब देखने को मिलने लगा है। बांधों से अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर बढ़कर 136.85 मीटर पर पहुंच गया है। गंगा में नरौरा बांध से 82603 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्तर और बढ़ने की उम्मीद है। वहीं करीब 50 गांवों में पानी घुसने से रास्ता बंद हो गया है। अधिकारियों ने निरीक्षण कर बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। रामगंगा में भी दो दिनों में एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। इससे इस नदी का जलस्तर भी बढ़ने की आशंका है।
मंगलवार को गंगा का जलस्तर 136.80 मीटर से बढ़कर 136.85 मीटर पर पहुंच गया, जो कि खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर दूर है। गंगा में खतरे निशान 137.10 मीटर पर है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से ऊगरपुर के ग्रामीणों के घरों में पानी भरने लगा है। गांव को जाने वाले रास्ते पर डेढ़ फीट पानी भर जाने से ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। आशा की मड़ैया को जाने वाले रास्ते पर दो फीट पानी बह रहा है। ग्रामीण अपने वाहन सड़क के किनारे खड़े कर पानी से होकर आते-जाते हैं। रामपुर को जाने वाले मार्ग पर भी पानी भर गया है। गांव जोगराजपुर, रतनपुर, तीसराम की मड़ैया, करनपुर घाट, लायलपुर, बमियारी, अमीराबाद आदि गांव में बाढ़ का पानी भरने लगा है। जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी होने लगी है।
रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ने आशंका बन गई है। खो, हरेली, रामनगर बैराज से सोमवार को 47160 क्यूसेक व मंगलवार को 80491 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दो दिन में 126137 क्यूसेक पानी नदी में छोड़े जाने से रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ना तय है। अभी रामगंगा नदी बिलोगेज पर है।
तेज धार से कट गई पायलिंग
सिंचाई विभाग की ओर से करनपुर घाट में कटान रोकने के लिए पिछले साल बल्लियां लगाकर पायलिंग की गई थी। अधिकारियों ने बताया था कि अब इन बल्लियों से टकराकर पानी दूसरी ओर चला जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गंगा की तेज धारा के चलते गांव में कटान होने लगा है। कटान होने से ग्रामीणों को चिंता सताने लगी है।
एसडीएम ने देखे बाढ़ क्षेत्र के गांव
अमृतपुर। एसडीएम संजय कुमार ने मंगलवार को बाढ़ से प्रभावित गांव तीसराम की मड़ैया, रामपुर, जोगराजपुर, लायलपुर, कुबेरपुर, कुतुलूपुर, नगरिया जवाहर,कंचनपुर सवलपुर, आशा की मड़ैया, उदयपुर का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। कहा कि कोई भी समस्या होने पर तहसील में बाढ़ कंट्रोल रूम पर शिकायत दर्ज कराएं। इससे तत्काल समस्या का समाधान किया जा सके। प्रभारी तहसीलदार अभिषेक कुमार, कानून गो व सभी लेखपालों को बाढ़ क्षेत्र के गांवों पर नजर रखने के निर्देश दिए। कहा कि जहां नाव की आवश्यकता हो वहां पर तत्काल प्रभाव से नाव लगाई जाए।
फोटो-25, गांव मिसतनी में सड़क पर भरे बाढ़ के पानी से निकलते बच्चे। संवाद
जलस्तर बढ़ने से गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
कंपिल। गंगा के बढ़ते जलस्तर से क्षेत्र के 12 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांव पथरामई, हमीरपुर मजरा जात, पलितपुरा, इकलहरा, बौरा बंगश, तपुआ चौडेरा, मिसतनी, मधवापुर सहित 12 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांव शेखपुर, कारव, पुंथर, बिहारीपुर, सींगनपुर, ठाकुर नगला, सहित 20 से अधिक गांवों के खेतों को बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ के विकराल रूप को देखकर ग्रामीण चिंतित है। मवेशियों को नजदीकी रिश्तेदारों के यहां पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों ने सड़क पर सुरक्षित स्थानों की तलाश कर नया आशियाना की खोज शुरू कर दी है।
24 गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप
कंपिल। 33/11 विद्युत उपकेंद्र कंपिल के धर्मपुर ग्रामीण फीडर के बाढ़ प्रभावित गांव इकलहरा, दूधेमई, कारव, पुंथर, सिंघनपुर, रामसिंह का नगला, ठाकुर नगला, शेखपुर, बिहारीपुर, मधवापुर, विधुत उपकेंद्र सिवारा के गांव पलितपुरा, पथरामई, हमीरपुर मजरा जात, बौरा बंगश, मिसतनी सहित 24 गांवों की विद्युत आपूर्ति विभाग ने बाढ़ की वजह से बंद कर दी है। जिससे ग्रामीण अंधेरे में रातें गुजारने को मजबूर है। (संवाद )