फर्रुखाबाद। कमालगंज क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव नगला खेम रैंगाई को गंगा के कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने 7.88 करोड़ रुपये की परियोजना बनाई। गंगा का जलस्तर अब लगातार बढ़ रहा है। इससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, लेकिन समय निकलने के बाद काम अभी तक अधूरा है।
गंगा में बाढ़ के दौरान हर वर्ष गांव नगला खेम रैंगाई पर खतरा मंडराने लगता है। गत वर्ष पंचायत घर व स्कूल गंगा में बाढ़ से कटान की जद में आ गया था। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए शासन से सात करोड़ 88 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई। करीब 900 मीटर लंबी इस परियोजना में 300 मीटर दूरी में पत्थर लगाए जाने हैं, जबकि शेष 600 मीटर दूरी में जियो बैग लगाने के साथ ही पारकोपाइन बनाई जा रही है।
बारिश की रफ्तार बढ़ने के साथ ही गंंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की आहट सुनाई देने लगी है। 15 जून तक बाढ़ राहत कार्य पूरा करने के आदेश थे। काम की धीमी रफ्तार के चलते समय अवधि निकलने के 15 दिन बाद भी सिंचाई विभाग परियोजना का काम पूरा नहीं कर सका है। इससे ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर 135.60 मीटर से पांच सेमी बढ़कर 135.65 मीटर पहुंच गया है। नरौरा बांध से गंंगा में एक लाख 22848 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे गंगा का जलस्तर और बढ़ने के आसार हैं।
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता सुखवंत सिंह ने बताया कि परियोजना का करीब 98 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। पिचिंग का काम कुछ शेष रह गया है। चार से पांच दिन में छूटा हुआ काम भी पूरा कर लिया जाएगा।