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बाढ़ राहत की कार्ययोजनाएं, जमीन पर नहीं आएंगी

Sat, 23 May 2015 11:32 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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हाकिमों ने बाढ़ राहत की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 16 मई को जिला स्तरीय बैठक  हो चुकी है। इसमें सरकारी महकमों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। एक जून से सिंचाई महकमे का कं ट्रोल रूम शुरू हो जाएगा। परकोपाइन स्पर बनाने की कार्रवाई चल रही है। बाढ़ राहत के तीन बड़े प्रोजेक्ट अधर में हैं। इनमें से एक प्रोजेक्ट को ही मंजूरी मिली है। यह
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प्रोजेक्ट नासा नाला पर बंधा बनाने का है।  दो प्रोजेक्ट बड़े साहबों की टेबिल पर हैं। नासा नाला प्रोजेक्ट पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। इस पर काम शुरू भी हो गया तो इस सीजन में पूरा नहीं हो पाएगा। इससे इलाकाई बाशिंदों के लिए बाढ़ के कहर से बच पाना मुश्किल होगा।

नासा नाला प्रोजेक्ट
शासन ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके तहत गंगा और रामगंगा के बीच बंधा बनना है। इसकी लंबाई करीब 3 किलोमीटर होगी। इस पर तकरीबन एक करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके बन जाने से गंगा और रामगंगा केे कटरी के 24 गांवों की आबादी को बाढ़ से राहत मिलेगी। इस प्रोजेक्ट पर जून के पहले सप्ताह में काम शुरू होने की
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उम्मीद जताई जा रही है। इस माह काम शुरू भी हो गया तो मानसून आने तक पूरा होना कतई संभव नहीं होगा। इससे इस प्रोजेक्ट से  इस सीजन में कोई फायदा मिलना मुश्किल है।

गंगा पर बंधा प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट सिंचाई विभाग ने बनाया है। इसके तहत गंगा पर 70 किलोमीटर लंबाई में बंधा बनेगा। इसकी लागत 2 27 करोड़ रुपया  है। यह कासिमपुर तराई से चौरा तक बनेगा। इससे बंधा के दोनों छोरों के बीच के गांवों से बाढ़ की आपदा टलेगी। बाढ़ से राहत का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट को अभी शासन से मंजूरी नहीं मिली है। फाइल लखनऊ में ही बड़े साहबों की मेजों पर घूम रही है।

रामगंगा सफाई प्रोजेक्ट
इसे भी सिंचाई विभाग ने बनाया है। इसके तहत रामगंगा की सफाई की जानी है। सिल्ट भी निकाली जाएगी। जिले में 23 किलोमीटर लंबाई में रामगंगा की सफाई होनी है। इसके लिए साढ़े पांच करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया गया है। रामगंगा के कटरी इलाकों के गांवाें को बाढ़ के कहर से बचाने के लिए यह प्रोजेक्ट भी महत्वपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाती तो बाढ़ की तबाही को कम किया जा सकता था।
 
यह तैयारियां शुरू
- बाढ़ शरणालय व बाढ़ चौकियों का चिन्हांकन।
- प्रभावित इलाकों में हैंडपंप के प्लेटफार्मों को ऊंचा किया जाना।
- बाढ़ कंट्रोल रूम खोलना। यह 1 जून से शुरू होकर अक्तूबर तक संचालित रहेगा।  

- अमृतपुर व क ायमगंज इलाकों में निजी पंप सेट मालिकों की सूची बनाना। जलभराव से निजात में इनका सहयोग लिया जाएगा।
- ब्लीचिंग व क्लोरीन टैबलेट का स्टाक।
- बालू भरी बोरियों का स्टाक।
- केरोसिन, डीजल व पेट्रोल को रिजर्व करना।

स्थायी हल की ओर जाना होगा: एमएम सिंह
सिंचाई महकमे के एक्सईएन एमएम सिंह का कहना है कि बाढ़ में कटान रोकने के लिए परकोपाइन स्पर बनाने की कार्रवाई चल रही है। बड़े प्रोजेक्ट में समय लगता है। हमें समस्या के स्थायी हल की ओर जाना होगा। वाटर रिचार्जिंग कर हम बाढ़ की विभीषिका को कम कर सकते हैं। ट्यूबवेल के कुआं में बरसात का पानी डाल कर रिचार्ज कर सकते हैं।

यह आसान होगा। इसके साथ ही मेड़ बंदी भी कर सकते हैं। इससे पानी नीचे समाता जाएगा। तालाबों में पानी स्टोर करने के इंतजाम भी कारगर होंगे। बरसात का पानी डंप करने से जलस्तर तो बढ़ेगा ही बरसात का पानी नदियों में कम मात्रा में पहुंचेगा।
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