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Farrukhabad News: चहेतों को मिलीं पंचायतें भरपूर, कोई दो को भी मजबूर

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कमालगंज। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रोजगार सेवकों की तैनाती पर मनमानी हावी है। हालत यह है कि कुछ रोजगार सेवकों के पास सात से नौ पंचायतें हैं तो किसी को दो के भी लाले हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और आजीविका की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना में रोजगार सेवक मुख्य कड़ी हैं। ब्लाक क्षेत्र की 118 ग्राम पंचायतों के लिए 52 रोजगार सेवक हैं, लेकिन इनकी तैनाती में मनमानी पर सवाल भी उठ रहे हैं। दरअसल, किसी रोजगार सेवक के पास एक ग्राम पंचायत है तो किसी को सात और उससे भी अधिक की भी जिम्मेदारी दी गईं हैं।
इस समय 20 रोजगार सेवकों के पास एक-एक ग्राम पंचायत है। जबकि रोजगार सेवक शिवशंकर व रामनरायन के पास सात-सात ग्राम पंचायतें हैं। सहदेव सिंह नौ पंचायतों की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। पंचायत बंटवारे में महिलाओं को भी दरकिनार किया गया है। सविता यादव, अफरोजा बानो, सोनम कटियार, ममता, कल्पना यादव व संजो देवी के हिस्से में एक ही पंचायत है।
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भेदभाव गलत, तीन ब्लाॅकों में मानदेय भी नहीं
कायमगंज के रोजगार सेवक व संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पंचायतों के आवंटन में इतना अधिक भेदभाव गलत है। लालच में चंद लोग अधिक पंचायतें ले लेते हैं। अतिरिक्त प्रभार में न्याय पंचायत का नियम भी लागू हो। बढ़पुर, नवाबगंज, मोहम्मदाबाद में रोजगारसेवकों को मानदेय नहीं मिला। तत्काल दिलाया जाए। खंड विकास अधिकारी त्रिलोकचंद्र शर्मा का कहना है कि उन्हें हाल में ही मनरेगा का प्रभार मिला है। पंचायत आवंटन की समीक्षा की जाएगी।
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मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार मिश्रा ने बताया कि पंचायतों के बंटबारे के मामले में अगर गड़बड़ी की गई है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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