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तीन अस्पताल सील करने के बाद स्वास्थ्य विभाग लाचार

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फर्रुखाबाद। शहर की आवास विकास कॉलोनी व उसके आसपास मसेनी चौराहे तक करीब दो दर्जन अवैध अस्पताल झोलाछाप चला रहे हैं। इनमें बड़े अस्पतालों के कंपाउंडर ऑपरेशन करने जाते हैं। आशा प्रसव कराने का ठेका लेतीं हैं। आए दिन मरीजों की जान पर झोलाछाप भारी पड़ रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे बैठा है।
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स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के चलते जिले में अवैध अस्पताल चल रहे हैं। नजर डालें तो शहर की आवास विकास कॉलोनी से मसेनी चौराहे तक दो दर्जन से अधिक अस्पताल बिना पंजीकरण के ही झोलाछाप चला रहे हैं। पांच दिन पहले तो एक अवैध अस्पताल में महिला का ऑपरेशन से प्रसव कराया गया। यह ऑपरेशन सर्जन के बजाय एक बड़े अस्पताल के कंपाउंडर ने किया। प्रसूता की हालत बिगड़ी तो उसी कंपाउंडर से दूसरा ऑपरेशन कर बच्चादानी ही निकाल दी। बाद में मरणासन्न हालत में छोड़कर अस्पताल कर्मी खिसक गए। फिर अस्पताल में विवाद और तोड़फोड़ भी हुई। इसके दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग ने तीन अवैध अस्पतालों को सील किया। फिर जिम्मेदारी अधिकारी चुप्पी साधकर बैठ गए। जबकि इन अस्पतालों के पास ही स्थित छह अवैध अस्पतालों पर नजर भी नहीं डाली। इन छह अस्पतालों के खिलाफ छह माह पूर्व शहर कोतवाली में तहरीर देने के बाद वापस ले ली गई थी। तब से स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में बिना पंजीकरण के ही झोलाछाप अवैध रूप से अस्पताल चलाकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
आशाओं को मिलता है मोटा कमीशन
झोलाछाप अपने अस्पताल में मरीज लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की आशाओं को मोटा कमीशन देते हैं। प्रसव के लिए जहां वैध अस्पताल 15 से 30 हजार का पैकेज ले रहे हैं। वहीं झोलाछाप 50 से 60 हजार रुपये तक ऐंठ रहे हैं। इसमें आशाओं का मोटा कमीशन भी तय है। गत सप्ताह भोलेपुर पीएचसी पर हुई मीटिंग के बाद कुछ आशाएं आपस में ही भिड़ गईं थीं। तो उन्होंने अपने क्षेत्र की गर्भवती को झोलाछाप के यहां भर्ती कराने का विरोध किया। कहा कि अपने-अपने क्षेत्र में कमाओ, दूसरे के क्षेत्र में क्यों घुस रही हो। इस विवाद में आशा कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी।
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सत्ताधारियों के फोन कर रहे परेशान
सीएमओ डॉ.सतीश चंद्रा ने बताया कि अवैैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद सिफारिश में नेताओं के फोन आते हैं। इससे अब तो कार्रवाई करने से भी डर लगने लगा है। जो तीन अवैध अस्पताल सील किए गए, उन पर कार्रवाई न करने का दबाव बनाया जा रहा है। फिर भी वह कार्रवाई करेंगे। अन्य अवैध अस्पतालों को भी सील कराया जाएगा। निजी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली आशा को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डीएम बोले, होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले में अवैध अस्पताल नहीं चलने दिए जाएंगे। सीएमओ से जांच कराकर अवैध अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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