परिवार के साथ बैठे शौर्य चक्र पाने वाले आलोक दुबे। संवाद
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फर्रुखाबाद। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों से शौर्य चक्र लेने बाद अपने निवास पहुंचे आलोक दुबे का मोहल्ले के लोगों ने फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। कुछ लोगों ने तो आरती भी उतारी। आलोक ने कहा कि यह सम्मान तो जिला और प्रदेश का है। वह तो मात्र माध्यम बन गया। उनके लिए तो सपना जैसा है।
कमालगंज के गांव भटपुरा निवासी आलोक दुबे 23वीं बटालियन दि राजपूत रेजीमेंट सिक्किम में हवलदार के पद पर तैनात हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर में तैनाती के वक्त 50 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। 22 जून 2019 को कश्मीर के सोपिया में अप्रत्याशित ऑपरेशन करके एक आतंकी को खुद ढेर किया और तीन टीम ने मार गिराए थे। इस साहसिक कार्य के लिए आलोक को शौर्य चक्र के लिए चयनित किया गया था। उन्हें 22 नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली में सम्मान दिया। इसके बाद वह अपनी पत्नी पूजा के साथ गुरुवार को कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन से स्टेशन पहुंचने के बाद मसेनी स्थित अपने निवास पर पहुंचे। यहां उनके बेटे सूर्यांश, बेटी सुहानी व शिवांगी के साथ कई रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग मौजूद थे।
घर में प्रवेश होने से पहले ही लोगों ने फूलमालाओं से लाद दिया। बच्चों ने पापा की आरती उतारी। रिश्तेदार और मोहल्ले कोे लोग सम्मान से अभिभूत थे। आलोक दुबे ने बताया कि ऑपरेशन के वक्त हाथ में हथियार और दुश्मन पर नजर होती है। कुछ नहीं सोचते। देश की रक्षा पहला धर्म है। सम्मान के लिए हम सैनिक काम नहीं करते। कभी नहीं सोचा था कि शौर्य चक्र जैसा सम्मान मिलेगा। यह सम्मान जिला और प्रदेश के लोगों को समर्पित है। वह 28 नवंबर को वापस जाएंगे। शुक्रवार को गांव में जाने का कार्यक्रम है।