फर्रुखाबाद। डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए पांच छात्र अभी फंसे हैं। टीवी सेट पर वहां के हालात देख परिजनों की जान सांसत में है। वे पल-पल में कभी बात कर तो कभी वीडियो कॉल के माध्यम से अपने बच्चों की सुध ले रहे हैं।
घरों से लेकर मंदिर-मस्जिदों में बच्चों की सलामती के लिए प्रार्थना व दुआएं की जा रही हैं। परिजनों का कहना है कि टीवी पर कुछ ठीक नहीं दिख रहा। वहां के दृश्यों को देख कलेजा मुंह को आ रहा है। एक छात्र के मुताबिक रूसी बमों के धमाकों से शहर की इमारतें भी हिल उठती हैं। प्रस्तुत है यूक्रेन के हालातों को बयां करती वहां फंसे छात्र-छात्राओं की जुबानी पर आधारित खबर-
शहर की आवास विकास निवासी कमलेश राजपूत शमसाबाद सीएचसी में सरकारी आवास में परिवार सहित रह रहे हैं। उनका पुत्र प्रतीक राजपूत उडेसा में एमबीबीएस की चौथी साल में है। प्रतीक की मां अनीता देवी ने बताया कि बेटे से बात हुई थी। उसने बताया कि बमों के धमाकों से इमारतें हिल रहीं हैं। लगातार धमाके सुनाई दे रहे हैं। उसकी बातें सुनने के बाद सुबह से ही किसी ने घर पर खाना नहीं खाया। प्रतीक दिवाली के बाद 18 नवंबर को गया था। वीडियो काल पर बात करते हैं, तो वह अपने कमरे में ही है। हालांकि शहर में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है।
शहर की आवास विकास कालोनी निवासी व कन्नौज के गुरसहायगंज सीएचसी में तैनात चीफ फार्मासिस्ट सुरेंद्र वर्मा का पुत्र अभिनव वर्मा एमबीबीएस पांचवीं वर्ष का छात्र है। सुरेंद्र ने बताया कि अभिनव पिछले साल अप्रैल में यूक्रेन गया था। आने वाली चार मार्च को उसकी वापसी की टिकट थी। यूनीवर्सिटी ने गुरुवार से ऑनलाइन क्लास शुरू की। यदि पहले से कर देते, तो टिकट पहले बुक करा देते। बेटे को फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है। वहां के प्रशासन ने बंकरों की लोकेशन बता दी है। अब सरकार को शीघ्र ही बच्चों को निकालने का प्रयास करना चाहिए।
आवास विकास कालोेनी निवासी अखिलेश गंगवार के पुत्र वरुण गंगवार ने फोन पर बताया कि उसके शहर में हाई अलर्ट है। मगर दुकानें खुल रही हैं। वह अभी सामान लेकर आए हैं। 26 फरवरी की टिकट बुक कराई थी, मगर निरस्त कर दी। किसी तरह की दिक्कत नहीं है। करीब 70 बंकरों की लोकेशन दी गई है। उसमें रहने, खाने पीने की सुविधा भी बताई जा रही है। पिता अखिलेश ने बताया कि वह चिंचित हैं, बेटा कैसे अकेले मुसीबतों का सामना कर रहा होगा। वह कुछ भी कहे लेकिन टीवी देखकर हालात सामान्य नहीं लग रहे हैं।
मोहम्मदाबाद के मोहल्ला अवंतीबाई नगर निवासी ध्रुव कुमार राजपूत की पुत्री वसुंधरा राजपूत यूक्रेन में एमबीबीएस की चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रही है। वसुंधरा ने परिजनों को बताया कि कालेज बंद हो गया। वह हॉस्टल में ही अपने सहेलियों के साथ रहने को मजबूर है। एक मार्च को घर जाने के लिए टिकट बुक की थी। लेकिन हमले के बाद से उसकी नींद उड़ गई है। भाई पवन कुमार राजपूत ने बताया कि बहन की फिक्र लगी हुई है। किसी तहरह वहां शांति हो तो वसुंधरा घर लौट सके।
फतेहगढ़ के मोहल्ला शीशमबाग कैंट निवासी डॉ. अनुपम वर्मा का पुत्र दिव्यांश वर्मा यूक्रेन के लिवीव शहर की मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस का छात्र है। पिता डॉ. अनुपम ने बताया कि दो दिन पूर्व लिवीव में धमाका हुआ था। दहशत में यूनिवर्सिटी के छात्र 15 किमी दूर एयरपोर्ट के लिए भागे पर पहुंचे नहीं सके। बेटे से बातचीत हो रही है। अब खाने-पीने के सामान की दिक्कत आने लगी है। जिससे बेटे की फिक्र बढ़ गई है। जनपद के स्थानीय स्तर पर भी कोई प्रयास किया जाना चाहिए।
दीनदयाल बाग निवासी विजय कुमार वर्मा उत्तराखंड में सिविल इंजीनियर हैं। उनकी पत्नी सुधा वर्मा शिक्षिका हैं। पुत्र हिमांशु वर्मा एमबीबीएस पांचवीं साल में है। हिमांशु 22 फरवरी की रात यूक्रेन से लौटा है। उसने बताया कि चार छात्रों के साथ फ्लैट लेकर रह रहे हैं। वहां दिक्कत तो नहीं थी। दादी मालती वर्मा, बाबा कालीचरन वर्मा एवं मां काफी परेशान होती थीं। पापा ने टिकट बुक करवा दी और कतर एअरलाइंस से वह चला आया। बताया कि वह तो आ गया, मगर दोस्तों की हर वक्त चिंता लगी रहती है।
शहर की आवास विकास कालोनी के पिंकू राठौर की बेटी तान्या यूक्रेन से 20 फरवरी को घर लौटी। तान्या ने बताया कि वहां का माहौल खराब हो रहा था। समाचार सुनकर परिजन चिंतित थे। लिहाजा टिकट बुक करवाकर घर आ गई। वहां फ्लैट में रह रही थी। हम छात्रों को दूतावास से पत्र मिले थे। उसमें कहा था कि जिसे जाना है, वह जा सकता है। फ्लैट से जब भी निकलें तो पासपोर्ट लेकर निकलें। साथी भाई वहां फंसे हैं, इसको लेकर चिंता है। दूतावास से मदद न मिलती तो निकलना मुश्किल हो जाता।
कादरीगेट के अशोक कुमार विद्यार्थी का पुत्र नितिन विद्यार्थी यूक्रेन की राजधानी कीव के मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में पढ़ रहा है। उसकी तीसरी साल है। कीव पर जिस दिन हमला हुआ, उससे एक दिन पहले ही नितिन हवाई जहाज से लौट आया। फिलहाल दिल्ली में अपनी बहन के यहां रुका है। जल्द ही सरकार सभी छात्रों को अपने देश में बुलाने की व्यवस्था करे।
वरुण गंगवार। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
नितिन विद्यार्थी। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
दिव्यांश वर्मा। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD