रामनगरिया में सांस्कृतिक छटा के साथ सनातन धर्म की दिन भर गूंज रही। विविध
संप्रदायों के संत अपने-अपने रंग में रंगे दिखाई दिए। जगह-जगह दानपुण्य,
धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे चलते रहे। मेला क्षेत्र में कल्पवासियाें के
आने का सिलसिला अभी भी जारी है।
दवाओं के वितरण में होम्योपैथिक और
आयुर्वेदिक चिकित्सक तैनात दिखे तो एलोपैथिक डाक्टर नदारद रहे। सर्द हवाआें
का असर मेले पर साफ दिखा। कल्पवासी व साधु संत अलाव के आसपास जमे रहे।
मेला सचिव एसडीएम सुनील वर्मा ने बुधवार को तैयारियां देखीं।
हनुमान भगवान शंकर के अवतार
मेला
क्षेत्र में स्वामी बजरंगदास ने हनुमान की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि
हनुमान भगवान शंकर के अवतार हैं। हनुमान को रामभक्त के रूप में याद किया
जाता है। भक्त के गुण सीखने हों तो हनुमान जी से सीख लेनी चाहिए। भक्त जब
अपना सब कुछ समर्पण कर देता है तो ईश्वर की कृपा उसे प्राप्त हो जाती है।
शास्त्रों में भक्त को ईश्वर के सबसे नजदीक बताया गया है।
इसी भक्ति भावना
के चलते हनुमान जी ने राम का दिल जीत लिया था। जब अयोध्या से समस्त वानर
समूह के लोग लौटने लगा तो भगवान राम ने केवल हनुमान को ही रुकने का आदेश
दिया। यह उनकी भक्ति का ही प्रसाद था। रामप्रकाश आश्रम में चल रही कथा कहते
हुए हरिचैतन्य बाबा ने कहा कि संसार दुखों का सार है। इससे पार होने के
लिए व्यक्ति को सद्गुणों को अपनाना चाहिए। सद्गुणी नाव से ही व्यक्ति
भवसागर को पार कर सकता है।
राशनकार्ड बनना शुरू
मेला
प्रशासन की ओर से आवंटित 15 राशन की दुकानों पर राशनकार्ड बनवाने के लिए
कल्पवासियों का आना शुरू हो गया। प्रशासन की ओर से राशनकार्ड बनाए जाने के
लिए सात लेखपालों की तैनाती की गई है। प्रत्येक लेखपाल को दो-दो दुकानों के
कार्ड बांटने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक दुकान पर 200 कार्ड के
हिसाब से सामग्री आवंटित की जाएगी। प्रत्येक कल्पवासी कार्डधारक को सप्ताह
में एक लीटर तो संतों को पांच से 10 लीटर केरोसिन दिया जाएगा।
अलाव जले
मौसम
के पलटा खाने से बड़ी सर्दी से निजात दिलाने के लिए कल्पवासियों के लिए
मेला प्रशासन की ओर से जगह-जगह अलाव जलवाने की व्यवस्था की गई है। इन्हें
हिदायत दी गई है कि झोपड़ियों के पास अलाव न जलाए।
आवंटित दुकानाें का चिन्हांकन शुरू
मेले
में 400 दुकानें आवंटित हो गई हैं। इनके चिन्हांकन का काम भी शुरू हो गया
है। मंगलवार को दुकानदार चिन्हांकन के लिए भटकते दिखे थे। बुधवार को
चिन्हांकन शुरू होने से उनके चेहरों पर मुस्कान दिखाई दी।
गंगा से 25 फीट दूर बैठेंगे गंगापुत्र
गंगा
स्नानार्थियों बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने गंगा किनारे तख्त डाले
बैठे गंगापुत्रों को हिदायत दी है कि वह अपने तख्तत गंगा से 25 फीट दूरी पर
डालें। इस पर अमल भी शुरू हो गया है।