किसानों की आय दोगुनी करने को सरकार विभिन्न योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं नलकूप विभाग में किसानों का हक मारने के साथ उल्टा उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। नलकूप खराब होने पर सुनवाई न किए जाने से किसान अपने खर्च पर मोटर ठीक कराते हैं। वहीं इस काम के लिए मिलने वाले सरकारी बजट का जिम्मेदार बंदरबांट कर रहे हैं।
किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल, इसके लिए सरकार राजकीय नलकूपों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। जनपद में 310 राजकीय नलकूप चालू दिखाए जा रहे हैं। हकीकत इससे काफी अलग है।
नलकूप के रखरखाव व मरम्मत के लिए मिलने वाले सरकारी बजट का बंदरबांट किया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी की जांच में कई जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटकने के बावजूद खेल जारी है। फाइलों में चालू 60 से अधिक नलकूप असल में बंद हैं। इन दिनों गेहूं की सिंचाई होनी है। उधर बंद नलकूप ठीक करने के लिए सुनवाई नहीं होती।
मोहम्मदाबाद मंडी के पीछे स्थित नलकूप एफजी-288, चिलसरा के एफजी-65, हरसिंगपुर गोवा के केएमजी-160 नंबर नलकूप एक सप्ताह से बंद हैं।
नलकूप का मोटर ठीक कराने बेवर रोड स्थित नलकूप विभाग के वर्कशाप पहुंचे किसान सुनील कुमार, राकेशचंद्र पाल, देवप्रकाश पाठक, अवनीश, राकेश बाथम आदि ने बताया कि कई बार कहने के बावजूद विभाग से कोई कर्मचारी मोटर खोलने नहीं जाता।
वह लोग मोटर खोलने व बांधने को प्राइवेट मिस्त्री को एक हजार रुपये पास से देते हैं। मोटर को वर्कशाप तक लाने व ले जाने में एक हजार रुपये भाड़ा खर्च करते।
तब नलकूप चालू हो पाता है। फसल की सिंचाई का दूसरा साधन न होने से पैसे खर्च करना मजबूरी है। इस कार्य के लिए शासन से विभाग को बजट मिलता है। किसानों का कहना है कि अधिशासी अभियंता ओपी गुप्ता व सहायक अभियंता अमर सिंह का कभी फोन रिसीव नहीं होता है।
मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि पहले कराई गई जांच में कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। किसानों को अपने खर्च पर नलकूप बनवाने, विभाग द्वारा समय से नलकूप ठीक न कराए जाने, बंद नलकूप चालू दिखाने के मामले की फिर से जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।