फर्रुखाबाद। जिले में आई बाढ़ के बाद अब जलस्तर तेजी से कम हुआ है। गांवों की गलियों और सड़कों पर भरा पानी कम होने लगा है। मगर गंगा में किनारों पर कटान तेज हो गया है। शुक्रवार को तीन गांवों में पांच मकान बह गए। अभी तक सदर तहसील की दिलीप की मड़ैया समेत चार गांवों में 46 मकान गंगा में समा चुके हैं। दौली की मड़ैया के ग्रामीणों में दहशत है। उन्होंने बचाव कार्य शुरू करने की गुहार लगाई है।
सदर तहसील के दिलीप की मड़ैया में हंसराम का पक्का मकान समेत कुछ झोपड़ी बची हैं। तहसील प्रशासन ने इस गांव में 47 आवास होने का दावा किया था। इसके साथ 31 मकान कटने की पुष्टि की है। इस गांव से पूर्व में करीब 200 मीटर दूरी पर बसी दौली की मड़ैया में कटान तेज हो गया। बृहस्पतिवार को देव सिंह और शुक्रवार को वीर सिंह का मकान गंगा की धार में बह गया।
बिलवालपुर के प्रधान रामौतार के पुत्र महाराम ने बताया कि जो मकान गिर रहे हैं, उनके मुआवजा दिलाने के लिए आवेदन किए जा रहे हैं। शुक्रवार को वीर सिंह का मकान गिरा है। कमालगंज के शेरपुर सराय ग्राम पंचायत के कुंडपुरा गांव में गंगा के कटान से शुक्रवार को धर्मेंद्र का मकान बह गया। ग्राम प्रधान भैंरोलाल के पुत्र रावेंद्र ने बताया कि धर्मेंद्र के लिए दैवीय आपदा योजना में मुख्यमंत्री आवास दिए जाने की मांग की है।
कायमगंज तहसील के शमसाबाद क्षेत्र में कटरी तौफीक में कटान तेज हो गया। चार दिनों में गांव के 11 मकान गंगा में समा चुके हैं। बृहस्पतिवार शाम गांव के सचिन का मकान गिर गया। मकान का पूरा लिंटर गंगा में गिरने से हुई तेज आवाज सुनकर लोग एकत्रित हो गए। कटान में आई तेजी से ग्रामीणों में दहशत बढ़ने लगी है। शुक्रवार को रामनिवास का मकान में गंगा में कट गया। गांव के नन्हें, मुनेश और संतोष के मकान कटान की जद में हैं।
कई मकान मुहाने पर आने से ग्रामीण सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर जाने में जुटे हैं। लेखपाल अजीत मिश्रा ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर में भी तीन मकान गिरने की सूचना मिली थी। उनकी सूची बनाकर तहसील को भेजी गई है। अन्य मकानों की भी सूची बनाई जाएगी।
कांशीराम कालोनी : मकानों से निकला पानी, गलियां लबालब
फर्रुखाबाद। शहर के मोहल्ला कांशीराम कॉलोनी के बाशिंदों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। जलस्तर कम होने से मकानों से पानी निकल गया है, मगर अधिकांश गलियां अब भी भरी हैं। इनमें सीवर टैंकों से निकली गंदगी की सड़ांध से घरों में रुकना मुश्किल है। पांच दिनों से पानी ठहर जाने से मच्छरों का लार्वा भी बनने लगा है। इससे संक्रामक रोग फैलने की आशंका है। जिम्मेदारों ने अभी तक एंटी लार्वा का छिड़काव करने की जरूरत नहीं समझी है। (संवाद)