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कल्पवासी मोक्ष की कामना लिए साधना में तल्लीन

Fri, 09 Jan 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला फर्रुखाबाद
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रामनगरिया में मोक्ष की कामना लिए साधु संत साधना में तल्लीन हैं तो कल्पवासी साधक बनकर ईश्वर की आस्था में डूब गए हैं।  लौकिक और परलौकिक सुख की चाहत में कल्पवासियों का आना जारी है। क्षेत्र को दान की नगरी कहा जाए तो अतिश्योक्ति न होगी।
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आने वाले लोग दिल खोलकर दानपुण्य में लगे हैं। इसके चलते यहां आस्था का उल्लास देखने को मिलता है। वहीं प्रशासन की व्यवस्था पर नजर डालें तो अब भी तमाम अव्यवस्थाएं  हैं। सुरक्षा का आलम जस का तस है। कई स्थानों पर हैंडपंपों की कमी से लोगों को पानी पीने के लिए गंगातट तक जाना पड़ रहा है।

गंदगी ने अभी से पैर पसारना शुरू कर दिया है। अग्निशमन दल के कर्मचारियों को क्षेत्र के बारे में जानकारी तक नहीं है। गुरुवार को मेला इलाकेे  में झोपड़ी में लगी आग को आसपास के लोगों ने बुझाया।
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1008 पूर्णेश्वरानंद महाराज के पांडाल में कथावाचक सत्यदेव ने भगवत गीता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भागवत में भगवान कृष्ण ने कर्म को ही प्रधान बताया है। कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है और कर्म से हीन मनुष्य को इस भौतिक संसार में कुछ भी हासिल नहीं होता।

उन्होंने भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच हुई वार्ता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब अर्जुन ने युद्घ क्षेत्र में अपने बंधुओं को अपने समक्ष खड़े देखा तो मोह के कारण अर्जुन अवसाद  में डूब गए। तब भगवान कृष्ण ने उनके अवसाद को दूर करने के लिए  उपदेश देते हुए कहा कि इस भौतिक संसार में कोई किसी का नहीं है।

यह तो एक रंगमंच है। इसमें सबके अपने-अपने किरदार हैं। इन किरदारों को निभाने के लिए मनुष्य का जन्म होता है। सब प्राणियों में मनुष्य ही श्रेष्ठ है, क्योंकि इसके पास बुद्घि का वास होता है। बुद्घि के बल पर ही वह अच्छे और बुरे कर्म का चयन कर सकता है।

वहीं बुलंदशहर से पधारी साध्वी मंशा भारती ने वृंदावन धाम की महत्वता को बताते हुए कहा कि भगवान कृष्ण को बैकुंठपुरी से अधिक वृंदावन धाम प्यारा है। वृंदावन उनका गृहक्षेत्र है और वृंदावन के कण-कण में उनकी स्मृतियां विद्यमान हैं। आज भी वृंदावन क्षेत्र में कृष्ण की उपस्थिति दिखाई देती है। यहां लोगों ने हरिनाम का  कीर्तन किया।

रामनगरिया क्षेत्र में संतों के परिक्रमा कार्यक्रम शुरू होने को हैं। प्रशासन ने दावा किया था कि सभी रास्तों को दुरुस्त करवा दिया गया है लेकिन 4 से 7 नंबर की सीढ़ी तक बने रास्तों को देखा जाए तो दावे खोखले साबित होते हैं। इन रास्तों पर अभी भी बड़े-बड़े गड्ढे हैं।

संतों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जल्द ही  उनका परिक्रमा कार्यक्रम शुरू होगा। रास्ते बदहाल रहे तो परिक्रमा कार्यक्रम में अड़चन आएगी। उनका कहना है कि इन मार्गों पर अभी भी प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। रात के अंधेरे में इन मार्गों से गुजरना खतरे से खाली नहीं है। 

रामनगरिया क्षेत्र की सुरक्षा के लिए स्थापित की गईं चौकियां अभी भी वीरान पड़ी हैं। इनमें पुलिस की तैनाती तो हो गई है। लेकिन कोई भी पुलिसकर्मी इन चौकियों में रुकना पसंद नहीं करता। इस बावत कोतवाली प्रभारी का कहना है कि तैनात पुलिसकर्मी चौकी पर नहीं मिलते हैं तो इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।

कल्पवास क्षेत्र में गंदगी का आलम यह है कि जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। प्रशासन ने स्वच्छता के संबंध में लंबे-चौड़े वादे किए थे। लेकिन सीढ़ी नंबर 2 के नीचे गंदगी के चलते पैदल निकलना भी दूभर है। साधुसंतों ने मेला प्रशासन से मांग की है कि गंदगी को तुरंत हटवाया जाए नहीं तो वह आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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