फर्रुखाबाद। मौसम के करवट बदलने के साथ ही गुरुवार को रिमझिम बारिश ने ठंड और बढ़ा दी है। दो दिन से धूप न निकलने से आलू की फसल में झुलसा रोग की आशंका बढ़ गई है। इससे चिंतित किसान फसल बचाने के लिए परेशान हैं।
दो दिन से मौसम खराब होने से आलू की फसल पर संकट गहरा गया है। बुधवार को बादल छाए रहने के साथ बूंदाबांदी हुई। देर रात से शुरू हुई बारिश गुरुवार को भी होती रही। धूप न निकलने से आलू की फसल में नुकसान की आशंका है। आलू किसान पहले से ही घाटे में है।
अक्तूबर में हुई भीषण बारिश से आलू और सरसों की फसल एक बार नष्ट हो चुकी है। दोबारा बुवाई के बाद खेतों में लहलहा रही फसल पर फिर संकट छा गया है। बादल छाये रहने के साथ हुई बारिश से ठंढ खासी बढ़ गई है। इससे बुजुर्ग घरों में ही दुबके रहे। ऐसे मौसम में आलू के अलावा सरसों और सब्जी की फसलों में भी नुकसान की आशंका है।
खेतों में खड़ी आलू की कच्ची फसल खोदकर किसान गेहूं की बुवाई करने की तैयारी में थे, लेकिन दो दिन से मौसम बिगड़ने के साथ हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया। इससे आलू की खोदाई नहीं हो पा रही है। मौसम साफ न होने पर गेहूं की बुवाई भी लेट होगी। इसके साथ ही किसानों को आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की चिंता सता रही है। आलू का उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका है।
दो दिन से मौसम खराब होने और बारिश होने से गेहूं की बुवाई अब और लेट होगी। गांव बरतल निवासी रामनिवास, मुकेश बाथम ने बताया कि गेहूं अभी थोड़े दिन पहले बोया था। पूरी तरह जमाव न हो पाने से नुकसान की आशंका है। गेहूं की पैदावार में भी फर्क पड़ेगा। खेतों में खड़ी बरसीम व चारे में पानी भर जाने से जानवरों को हरे चारे की भी दिक्कत हो गई।
छिड़काव कर झुलसा से बचाएं आलू
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बारिश गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है। यदि दो-तीन दिन तक मौसम साफ नहीं होता है तो आलू की फसल में नुकसान की आशंका है। इसके लिए किसान 200 ग्राम मैंकोजेब व नौ ग्राम स्टेप्टोसाइक्लीन 100 लीटर पानी में घोल बनाकर आलू की फसल में छिड़काव करें। इससे फसल को झुलसा रोग से बचाया जा सकता है।
शहर के कर्बला मोड पर पुरानी चुंगी के पास रोड पर भरा पानी। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
राजेपुर में क्रय केंद्र पर धान लदी ट्रैक्टर-ट्राली पर पड़ी पॉलिथीन। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD