भारतीय महाविद्यालय में शुक्रवार को डा. भीमराव अंबेडकर के विचारों की
वर्तमान प्रासंगिकता विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता
डा. विपिन कौशिक ने कहा कि भारतीय संविधान में आरक्षण का कहीं जिक्र नहीं
है और न ही इसकी पहल डा. अंबेडकर ने की। उन्होंने तो सामाजिक समरसता के लिए
प्रतिनिधित्व प्रणाली पर जोर दिया था। छात्र-छात्राओं ने शोध पत्र भी
प्रस्तुत किए।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित संगोष्ठी में
डा. कौशिक ने कहा कि डा. अंबेडकर ने मानवता की रक्षा के लिए भारतीय
संविधान की पृष्ठभूमि तैयार करने के साथ ही देश की राजनीति में सामूहिक
उत्तरदायित्व के निर्वहन के लिए संसदीय व्यवस्था की स्थापना में महत्वपूर्ण
योगदान दिया। मुख्य अतिथि डा. प्रशांत त्रिपाठी ने कहा कि हिंदू समाज में
व्याप्त रूढ़िवादिता को समाप्त करने के लिए डा. अंबेडकर ने जीवन भर संघर्ष
किया।
उन्होंने हिंदू एकता स्थापित करने के लिए हिंदू वर्ग के सबसे निचले
पायदान पर जीवनयापन करने वाले दलितों को विकास के कई नए आयाम दिए। विशिष्ट
अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल ने डा. अंबेडकर के समग्र दर्शन पर
कहा कि उनके विचार आज भी प्रसांगिक हैं
अध्यक्षता कर रहे डा. ओमप्रकाश मिश्र
कंचन ने कहा कि राजनीतिक दलों ने भारत के कई विचारकों को राजनीतिक सीमाओं
में बांधने का प्रयास किया। अंबेडकर भी इस दलीय राजनीति का शिकार हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां वागेश्वरी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप
प्रज्ज्वलित कर किया गया। प्राचार्य डा. विश्राम सिंह यादव ने आए अतिथियों
को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया।
महाविद्यालय के प्रबंध
सचिव राजेंद्र कुमार त्रिपाठी व उपाध्यक्ष अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ ने
धन्यवाद ज्ञापित किया।
प्राचार्य डा. केएम सचदेवा, प्रो. आरटी पटेल,
डा. राजेश मिश्रा, डा. अनिल मिश्रा, डा. अजय सिंह, डा. सुरेंद्र कुमार डा.
मनमोहन गोस्वामी, डा. संतोष त्रिपाठी, संजय गर्ग, डा. एसएन त्रिवेदी, डा.
आलोक बिहारी, डा. अवधेश शुक्ल, प्रो. रमन प्रकाश, प्रदीप शुक्ल, डा.
गायत्री मिश्रा और अर्चना दुबे आदि मौजूद रहे। संचालन प्रोफेसर रमाशंकर
मिश्र ने किया।