अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ से जर्जर हुए चाचूपुर मार्ग से वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया है। बाढ़ उतरने के तीन माह बाद भी अधिकारियों ने मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया। जिसके चलते गड्ढायुक्त सड़क से निकलने वाले ग्रामीण परेशान हैं।
चाचूपुर कड़हर मार्ग गंगा की बाढ़ के दौरान जर्जर हो गया था। चाचूपुर से भरखा तक करीब 5 किमी यह मार्ग पूरी तरह से उखड़ गया है। बाढ़ उतरने के तीन माह बीतने के बावजूद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सड़क की मरम्मत कराने की सुध नहीं ली। गड्ढे भी नहीं भरवाए गए। इसके चलते इस मार्ग से जुड़े गांव आंतर, सरह, तेराअकबरपुर, सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा, सवासी, गोपालपुर, कडहर, सलेमपुर, महमदगंज, नगला दुर्गू, सवितापुर सहित करीब 100 गांव के ग्रामीणों का गड्ढायुक्त सड़क से सफर तय करना मुश्किल हो रहा है। राहगीर 10 मिनट का रास्ता आधा घंटे में तय कर पा रहे हैं। डीएम ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को आदेश दिए थे कि बाढ़ उतरने के बाद सभी सड़कों की मरम्मत कराई जाए। इसके बावजूद तीन माह बाद भी मार्ग की मरम्मत नहीं कराई गई।
मार्ग खराब, हादसों को दावत दे रहा है।
शिक्षक पवन यादव का कहना है कि पिछले साल आई बाढ़ से चाचूपुर मार्ग कट गया था। इस वर्ष बाढ़ से पूरा मार्ग ही खराब हो गया है। इससे आने-जाने में परेशानी हो रही है। जर्जर सड़क की उखड़ी गिट्टी से दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिरने से घायल हो रहे हैं।
शशिकांत अग्निहोत्री का कहना हैं कि बाढ़ से कटे चाचूपुर मार्ग न बनाए जाने से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। बाइक चालक कमर दर्द के मरीज बन रहे हैं। इस मार्ग से कड़हर तक हजारों की संख्या में बाइक सवार निकलते हैं।
सर्वेश सिंह का कहना है कि बाढ़ उतरने के बाद अधिकारी निरीक्षण कर गए थे। डीएम ने पीडब्ल्यूडी को बाढ़ से कटी सड़कें ठीक कराने के आदेश भी, लेकिन अभी तक सड़क सही नहीं कराई गई है।