सातनपुर मंडी में खुला गेहूं क्रय केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
जिला प्रशासन की ओर से खोले गए 65 गेहूं क्रय केंद्र में हालात यह हैं कि खाद एवं रसद विभाग को गेहूं खरीदने के लिए धेला भर बजट नहीं मिला है और न ही बारदाना उपलब्ध कराया गया है। क्रय केंद्र प्रभारी सिर्फ कांटा बांट लगाकर बैठे हैं। सरकारी गेहूं खरीद के लिए खाद्य विभाग की ओर से पांच केंद्र खोले गए हैं। पीसीएफ के सर्वाधिक 31 केंद्र जिले भर में खोल दिए गए हैं। यूपीएसएस के 21 और एग्रो के चार, राज्य कर्मचारी निगम के चार गेहूं क्रय केंद्र खोले गए हैं।
अभी तक विभागों को खरीद का लक्ष्य नहीं दिया गया है। किसी भी केंद्र पर न तो बारदाना भेजा गया है और न ही खरीद के लिए पैसा भेजा गया है। मौजूदा समय में केवल दिखाने के लिए कांटा-बांट लेकर अधिकारी बैठ गए हैं। इस संबंध में राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि उनके विभाग की ओर से चार क्रय केंद्र खोले गए हैं। अभी तक खरीद का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। यहां गेहूं किसान मई, जून के महीने में क्रय केंद्रों पर लाता है। अभी तो गेहूं खेतों में खड़ा है।
डिप्टी आरएमओ अनुराग पांडेय ने बताया कि जिले में 65 गेहूं क्रय केंद्र खोले गए हैं। गेहूं खरीदने के लिए अभी तक बजट नहीं मिला है। बजट मिलते ही विभागों के खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी के साथ होने वाली अगली बैठक में खरीद का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया जाएगा। गेहूं बेंचने वाले किसान के खाते में पैसा ट्रांसफर किया जाएगा।
विकास खंड कमालगंज के गांव बहवलापुर के रहने वाले श्यामपाल सिंह का कहना है कि गेहूं क्रय केंद्रों पर उनके यहां के किसान गेहूं बेंचने नहीं जाते। खुले बाजार से भले ही कुछ रुपये महंगा गेहूं बिकता है लेकिन छंटना लगाकर और कटौती काटकर खुले बाजार से कम दाम मिलते हैं।
विकास खंड मोहम्मदाबाद के गांव बाग रठौरा के रहने वाले बबलू दीक्षित का कहना है कि गेहूं क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं तुलवाने के लिए किसानों के कई दिन लग जाते हैं। इस वजह से बहुत कम किसान गेहूं क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेचने के लिए जाते हैं। बिचौलियों के माध्यम से केंद्र प्रभारी खरीद का लक्ष्य पूरा करते हैं।