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Did farmers claim Kharif 7991

Mon, 06 Apr 2015 11:38 PM IST
7991 किसानों का आया खरीफ का क्लेम
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अमर उजाला के मुद्दा बनाने के बाद सरकारी मशीनरी चेती तो सूखा राहत का 6 माह से फंसा क्लेम का पैसा रिलीज हो गया। यह आरटीजीएस से किसानों के खाते में जाएगा। सूखा राहत के दायरे में 7991 किसान हैं। बीमा कंपनी एचडीएफसी एरगो ने कितना पैसा रिलीज किया है, यह हाकिमों को भी पता नहीं है। रबी की  फसल में नुकसानी क्राप कटिंग के बाद
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तय होगी। इससे किसानों को फरवरी और मार्च में हुई तबाही की प्रतिपूर्ति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
जिले में खरीफ की फ सल सूखा की चपेट में आई थी। धान को खासा नुकसान हुआ था। 7991 किसान फ सल बीमा से आच्छादित थे। इन्होंने प्रीमियम भी चुकाया था। इन्हें बीमा कंपनी एचडीएफसी एरगो ने क्लेम नहीं दिया। रबी में नुकसान

पर बीमा क्लेम को मुद्दा बनाने के बाद सरकारी मशीनरी सक्रिय हुई। इसके बाद बीमा कंपनी ने क्लेम का पैसा रिलीज किया है। यह पैसा जिले में बैंकों की रीजनल शाखाओं में जाएगा। यह आरटीजीएस से किसानों के खाते में भेजेंगी। डीडी कृषि एके सिंह ने बताया कि खरीफ  में क्लेम का पैसा बीमा कंपनी ने रिलीज कर दिया है। यह कितना पैसा है, इसकी
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जानकारी की जा रही है। बीमा कंपनी के जिम्मेदार सतेंद्र सत्येन फोन नहीं उठा रहे हैं।
फरवरी व मार्च में हुई बरसात ने खासी तबाही मचाई है। इससे बड़े पैमाने पर रबी, सरसों व आलू की फ सल में तबाही हुई।

जिले में 6211 किसान  रबी की फसल की में बीमा से आच्छादित हैं। बीमा कं पनी ने अभी तक सर्वे नहीं किया है। क्र ाप कटिंग के जरिए नुकसानी तय होगी। कंपनी सर्वे की कार्रवाई में देरी कर रही है। किसान गेहूं का काटकर मड़ाई करने लगे हैं। जब खेतों में फसल ही नहीं होगी तो क्राप कटिंग कहां होगी।

50 हजार रुपया हेक्टेयर नुकसानी
रबी व खरीफ  की फ सल के लिए 50 हजार रुपया प्रति हेक्टेयर प्रतिपूर्ति तय है। केसीसी से लिए गए लोन व प्रीमियम से भी नुकसानी तय होती है।

प्रीमियम लिया नुकसानी का आंकलन नहीं
जिले में सत्र 2014-2015 में 17961 किसानों ने नए क्रेडिट कार्ड लिए हैं। 32965 किसानों ने क्रेडिट कार्ड का रिन्यूवल कराया है। इस सत्र में किसानों ने 30 लाख रुपया बीमा कंपनी को प्रीमियम दिया है। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने नुकसानी का आंकलन नहीं किया है। किसान नेता अशोक कटियार कहते हैं कि बीमा कंपनी लापरवाही बरत रही है। जिले के अधिकारियों को बीमा कंपनी के अधिकारियों से बात करनी चाहिए।

उपभोक्ता फोरम जा सकते किसान
धर्मवीर गौतम एडवोकेट का कहना है कि अगर किसान ने फसल बीमा करा रखा है और कंपनी क्लेम का भुगतान नहीं कर रही है तो किसान उपभोक्ता फोरम जा सकते हैं। फोरम फसल के नुकसान का सर्वे करने का आदेश जारी करेगा। सर्वे के आधार पर किसानों को भुगतान किया जाएगा।

क्लेम के पैसे की जानकारी नहीं
एलडीएम रवींद्र कुमार का कहना है कि खरीफ की फसल में हुई नुकसानी के क्लेम के पैसे रिलीज होने की जानकारी नहीं हैं। अभी बीमा कंपनी से जानकारी कर रहे हैं। इसके बाद बता पाएंगे।

केस: 1
अकराबाद के हेमंत राजपूत का कहना है कि केसीसी है। लिमिट 1 लाख 90 हजार रुपया है। 18 बीघा में गेहूं बोया था। 50 फीसदी से ज्यादा नुकसानी है। सर्वे नहीं हुआ है।

केस: 2
सिरौली के रमेश चंद्र ने बताया कि केसीसी है। बैंक ने प्रीमियम भी काट लिया। गेहूं में 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ। सर्वे नहीं हुआ।

केस: 3
नगला समाधान के किसान विक्रम सिंह ने बताया कि केसीसी की लिमिट सवा लाख रुपया है। लोन भी लिया है। बैंक क्लेम से मना कर रही है।

केस: 4
असगरपुर के  अजय पाल ने बताया कि नुकसानी का सर्वे ही नहीं हुआ। पांच बीघा में गेहूं बोया था। बेेमौसम बरसात ने आधी से ज्यादा फसल बर्बाद कर दी। क्लेम के लिए भटक रहे हैं।
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