फोटो-16 दरौरा के पेरी में ट्रैक्टर से जोती जा रही आलू की फसल। संवाद
कमालगंज। इस बार आलू की फसल में चेचक व घुंघिया रोग ने भी किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। हर साल कच्ची फसल में तेजी के दौरान चेचक व घुंघिया रोग वाला आलू भी करीब 10-15 प्रतिशत कम भाव पर बड़ी आसानी से बिक जाता था। इस बार मंदी के इस दौर में रोग लगे आलू की हालत बहुत खराब है इसके खरीदार नहीं मिल रहे। दरौरा ग्राम पंचायत के पेरी निवासी दुर्विजय सिंह को आलू का कोई खरीदार नहीं मिला तो उन्होंने खेत में ही रोटावेटर से फसल जोतवा दी।
किसान दुर्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने आलू की कुड़ी को खोदकर कई व्यापारियों को आलू का नमूना दिखाया लेकिन किसी ने भी 100-125 रुपये पैकेट में भी खरीदने की हामी नहीं भरी। इसलिए उन्होंने पांच-छह बीघा आलू की फसल को रोटावेटर चलवाकर जोतवा दिया। वह अब मक्का की फसल बोएंगे। बताया कि रुपये न होने से उन्होंने अपनी बकरी बेचकर 525 रुपये किलो के हिसाब से मक्का का बीज खरीद लिया है। अभी आठ बीघा आलू और है। आलू कमजोर होने से वह भी किसी ने नहीं खरीदा तो उसे भी खेत में जोतवा देंगे। दरौरा के पूर्व प्रधान आछेलाल ने बताया कि गांव के संतोष ने भी भाव ठीक न मिलने से दो बीघा आलू खेत में जोतवा दिया।
फोटो-16 दरौरा के पेरी में ट्रैक्टर से जोती जा रही आलू की फसल। संवाद