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आरोपों से घिरे डिप्टी सीएमओ जांच कमेटी से बाहर

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बाहरी डॉक्टरों के कागज पर निजी अस्पतालों को लाइसेंस जारी किए जाने के खेल का खुलासा हो गया है। आईएमए की शिकायत पर डीएम ने नगर मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी। एक सप्ताह पूर्व हुई सात नर्सिंग होम की जांच में अधिकांश जगह डॉक्टर मौजूद ही नहीं मिले।
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बिना डॉक्टर के चल रहे नर्सिंग होम के लाइसेंस जारी करने में डिप्टी सीएमओ की विशेष भूमिका सामने आई। इसकी जानकारी पर डीएम ने डा. एपी सिंह को जांच कमेटी में नामित करते हुए डिप्टी सीएमओ डा.राजीव शाक्य को हटाने का आदेश कर दिया है।
शहर से लेकर कस्बों तक करीब 50 नर्सिंग होम बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। वहीं गैरजनपदीय व सरकारी डॉक्टरों के नाम से भी नर्सिंग होम के पंजीकरण कराए गए। जिले में स्वास्थ्य विभाग से पंजीकृत 113 नर्सिंगहोम संचालित हैं। इनमें अधिकांश नर्सिंगहोम झोलाछाप चला रहे। आईएमए के डॉक्टरों ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की।
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इस पर जिलाधिकारी ने नगर मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य, डिप्टी सीएमओ डा.राजीव शाक्य, सीओ सिटी मन्नीलाल गौंड व आईएमए की डा.अलका जैन की जांच कमेटी गठित कर दी। 16 जनवरी को जांच कमेटी ने मसेनी चौराहे स्थित सात नर्सिंग होम की जांच की। अधिकांश में कोई एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद नहीं मिले।
इसके अलावा भी कई खामियां मिली थीं। डिप्टी सीएमओ डा.राजीव शाक्य नर्सिंग होम के पंजीकरण व झोलाछाप उन्मूलन के नोडल अधिकारी हैं। जांच के दौरान वे भी यह नहीं बता सके कि किस अस्पताल में कौन डॉक्टर कार्यरत है और किस डॉक्टर के नाम पर लाइसेंस जारी किया गया है।
खास बात तो ये कि सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण पटल कायमगंज में तैनात कुष्ठ विभाग के एनएमए से दिखवाया जा रहा है। पूरे मामले की जानकारी नगर मजिस्ट्रेट ने जिलाधिकारी को दी। इस पर जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने जांच कमेटी से डिप्टी सीएमओ डा.राजीव शाक्य को तत्काल हटाकर उनके स्थान पर दूसरे डिप्टी सीएमओ डा.एपी सिंह को तैनात करने के आदेश सीएमओ को दिए है। सीएमओ डा.चंद्रशेखर ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश का अनुपालन किया जाएगा।
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