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Farrukhabad News: मिलावटखोरों से विभागीय मेल, बिगाड़ रहा लोगों की सेहत

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स्थानीय दु​कान पर रखी रेडीमेड डोडा मिठाई। - फोटो : स्थानीय दु​कान पर रखी रेडीमेड डोडा मिठाई।
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नवाबगंज। रोजमर्रा की मिलावटी और एक्सपायर खाद्य वस्तुओं पर प्रभावी कार्रवाई न होने से काला कारोबार गुलजार है। एक्सपायर मसाले और मिलावटी पनीर खाने से मांगलिक कार्यक्रम में 63 से अधिक लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए।
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मिलावट के इस कारोबार में विभागीय जिम्मेदार घटना के बाद जागे तो मौके पर सैंपलिंग की खानापूर्ति करके मामला निपटा दिया गया। वहीं, कस्बे में बड़े पैमाने पर मिलावट का कारोबार बदस्तूर जारी है। स्थानीय व्यापारियों की माने तो मिलावट के इस कारोबार में खाद्य विभाग की सांठगांठ रहती है।
थाना क्षेत्र के अथरूइया गांव में गुरुवार को लगभग 63 लोग एक्सपायर मसाले और मिलावटी खाद्य पदार्थों के प्रयोग से बीमार पड़ गए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज में लगभग 37 लोग इलाज के लिए भर्ती कराए गए। वहीं, 28 लोग हरियाणा के अंबाला कैंट में एवं मैनपुरी आदि जनपदों में इलाज हेतु भर्ती हुए। गोद भराई कार्यक्रम में शिवराम शाक्य के घर शामिल हुए लोगों की खाना खाने के बाद ही हालत बिगड़ने लगी थी। शिवराम शाक्य के बताया कि उन्होंने 30 किलो पनीर एक प्रतिष्ठित दुकान से खरीदा था। पनीर और एक्सपायर मसालों के प्रयोग ने घर पर आई खुशियों को ग्रहण लगा दिया।
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कस्बे में हो रहा नकली मिठाई और पनीर का कारोबार
एक सामान्य आंकड़े के अनुसार कस्बे में रोजाना दो क्विंटल से ज्यादा नकली पनीर बिक रहा है। चौराहे पर एक प्रतिष्ठित दुकानदार के यहां काम कर रहे हलवाई ने बताया कि एक किलो सिंथेटिक पनीर पाउडर 140 रुपये किलो बाजार में मिलता है। जिसे एक किलो दूध में डालकर पनीर बना दिया जाता है। नकली पनीर बनाने की लागत 190 तक पहुंच जाती है। तैयार पनीर खुलेआम 280 रुपये किलो बिक जाता है। इस तरह 110 रुपये का शुद्ध लाभ दुकानदार को हो जाता है। हलवाई की माने तो असली पनीर बनाने में पांच किलो दूध से एक किलो पनीर बन पाता है। बाजार में अच्छा दूध 60 रुपये में मिलता है। ऐसे में असली पनीर की लागत 300 रुपये आती है।

इटावा और मैनपुरी से संचालित है नकली कारोबार
बाजारों में नकली डोडा बर्फी 160 रुपये में बिक रही है। यह बर्फी इटावा और मैनपुरी के मिलावटखोरों के जरिये बाजार में खपाई जा रही है। वहीं, नकली सोनपापड़ी महज 65 रुपये किलो के थोक भाव में मिल जाती है। जो दुकान पर खुलेआम 200 से 250 रुपये किलो बिक जाती है। वहीं, सिंथेटिक दूध की रेडीमेड बर्फी 140 रुपये थोक भाव में लाकर 300 रुपये किलो बेची जा रही है। सिंथेटिक छेना हो या फिर पेड़ा सभी उत्पादों में मिलावट का खेल बदस्तूर जारी है।


मिलावट के खेल में शामिल हैं विभागीय जिम्मेदार

एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जो व्यक्ति आगरा और इटावा मैनपुरी से नकली मिठाई का कारोबार कर रहे हैं। वह प्रतिमाह पांच हजार रुपये खाद्य विभाग को देते हैं। इसकी वजह से इन कारोबारियों पर कभी कार्रवाई नहीं होती। इटावा और मैनपुरी के मिलावटखोरों का सप्लाई किया हुआ मिलावटी सामान खुलेआम प्रत्येक मिठाई की दुकान में मिल जाएगा।


हर दुकानदार से प्रतिमाह हो रही लाखों की वसूली
दुकानदार ने यह भी बताया कि प्रत्येक मिठाई दुकानदार से 500 रुपये प्रति माह खाद्य विभाग को दिया जाता है। इसका पैसा चौराहे पर प्रतिष्ठित दुकानदार के पास जमा होता है। वहीं, परचून दुकानदार ने बताया कि उन्हें भी हर महीने विभाग को पैसे देने पड़ते हैं। पैसे देने के बाद सैंपलिंग में फंसने का डर नहीं रहता है। पैसा न देने पर यह लोग फंसा देने की धमकी देते हैं। इसके साथ त्योहार पर प्रत्येक दुकान से तीन हजार वसूले जाते हैं। होली, दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर नजराना अलग से देना होता है।


ऐसे होता है सैंपलिंग का खेल

खाद्य विभाग नवाबगंज की दुकानों पर जब भी छापा मारता है तो दुकानदारों से पैकिंग वाले प्रोडक्ट का सैंपल भरवाने को कहता है। क्योंकि पैकिंग वाला सैंपल कंपनी की बिलिंग पर उपलब्ध होता है। इसकी जिम्मेदारी कंपनी की होती है। इस तरह स्थानीय दुकानदार को फायदा पहुंचा दिया जाता है और सैंपलिंग का काम भी पूरा हो जाता है। क्षेत्र के ज्यादातर दुकानदार पैकिंग का सैंपल भरवा कर खाना पूरी कर लेते हैं। वहीं, विभाग के कर्मचारी पहले से ही मुख्य व्यक्ति को सूचना दे देते हैं। इससे दुकानदार सजग हो जाते हैं।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. शैलेंद्र रावत ने बताया कि शुक्रवार को फूड प्वाइजनिंग होने की घटना के बाद नमूने लिए गए है। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी। इलाके में अगर मिलावट कारोबार सक्रिय है तो टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।
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