फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा नदी में जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। जलस्तर के उतार-चढ़ाव के बीच तेजी से कटान जारी है। पंखियन की मड़ैया में दो दिनों में पांच पक्के मकान गंगा की गोद में समा गए। वहीं दो अन्य ग्रामीणों की झोपड़ियां भी नदी की धारा में बह गई। गंगा के कटान ने अब घनी बस्ती की ओर रुख कर लिया है।
ग्राम प्रधान का कहना है कि यदि ऐसे ही कटान होता रहा तो अगले दो-तीन दिनों में घनी बस्ती में कटान होने लगेगा। वहीं राहत सामग्री न मिलने और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था से ग्रामीण परेशान हैं। पहाड़ों पर हो रही जोरदार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के चलते विगत करीब एक महीने से जनपद में बाढ़ का प्रकोप फैला है। गंगापार के इलाके सहित चार ब्लॉकों के लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बढ़पुर ब्लॉक के गांव पंखियन की मड़ैया में गंगा नदी का कटान तेजी से जारी है। बुधवार रात अनीस अंसारी और जमालुद्दीन के मकान नदी में समा गए। गुरुवार को तनवीर, नसीम, भूरा के पक्के मकान, आमिर खान, और नाटौल की मड़ैया गंगा की धार में बह गईं। इससे पहले ग्राम प्रधान शहनाज सहित करीब 10 परिवारों के मकान भी नदी में बह चुके हैं।
पूरा गांव बाढ़ के पानी से घिरा होने के चलते कुल लोगों ने परिवार के साथ सड़क किनारे डेरा जमा लिया है। ग्राम प्रधान शहनाज ने बताया कि गंगा की तेज धारा अब घनी बस्ती की ओर रुख कर रही है। बताया कि यदि इसी तरह से कटान होता रहा तो दो से तीन दिनों में बस्ती में बने घर कटान की जद में आ जाएंगे। इससे लोगों का बहुत नुकसान होगा। प्रधान का कहना है कि गांव के पास स्थित दौली की मड़ैया में पड़ी 23 झोपड़ी गंगा में समा चुकीं हैं।
वहीं ठठा की मड़ैया से गंगा की धारा महज 40 मीटर की दूरी पर है। यहां के वाशिंदे खौफ के साए में जी रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पशुओं की स्थिति खराब है। कीचड़ और पानी में रहने से पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग हो रहा है। बाढ़ में पशुओं का चारा बह गया है। ग्रामीणों को दूर के खेतों से घास लानी पड़ रही है।
विकास खंड क्षेत्र के गांव भुडिया भेड़ा को जाने वाली सड़क का लगभग 15 फीट हिस्सा गंगा की बाढ़ में बह गया। इससे लोगों को आवागमन करने में काफी दिक्कत हो रही थी। गुरुवार को गांव के अनुराग शुक्ला, देवेश, हरिओम, मनोज, रोहित शुक्ला, मोरपाल, वेदराम, भूरे त्रिवेदी, मलखान सिंह आदि ग्रामीणों ने सीमेंट और खाद की खाली बोरियों में ईंट-पत्थर भरकर कटान वाले स्थान पर डाले। पास में खड़े यूकेलिप्टस के पेड़ों को काटकर सड़क के दोनों सिरों पर डाला। पानी के तेज बहाव के चलते कुछ पेड़ बह गए। कुछ को जतन कर ग्रामीणों ने जोड़कर निकलने के लिए मार्ग बना लिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के भरोसे रहने से कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। इस कारण स्वयं श्रमदान कर सड़क की मरम्मत कर ली है।
खंड विकास क्षेत्र में बाढ़ के कारण कई मार्ग कट गए हैं। ग्रामीणों के पास आवागमन का महज एक सहारा नाव बची है। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद भी अभी तक कई गांवों में पानी भरा हुआ है। बाढ़ क्षेत्र के गांव ढाई घाट से कायमगंज मार्ग का रोड़ बिरिया डांडा के पास कट गया। चौराहार गांव से भगवानपुर जाने वाला मार्ग, इस्लामनगर और चौराहार के बीच में पानी के वेग से कट गया है। चौराहार गांव से अमृतपुर मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। झौवा गांव से रूपपुर मंगलीपुर मार्ग कटरी तौफीक में कई स्थानों पर कटने से लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी गांव समैचीपुर चितार में कच्चे और पक्के मकानों में पानी भरा है। गांव की गलियां जलमग्न होने से ग्रामीणों को बाढ़ के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।