फर्रुखाबाद। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के डाटा संशोधन में भी गड़बड़ियां हो रही हैं। सत्यापन के बाद भी मृतकों के खाते में किस्त जाती रही। वहीं कई ऐसे किसान जो जीवित हैं, वे सम्मान निधि पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। पोर्टल पर डाटा संशोधन कराने के बाद भी किसानों को निधि के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।
जनपद में करीब एक लाख 96 हजार किसानों को सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। किस्त आने के बाद कुछ किसानों की सम्मान निधि रुक जाती है। फिर केंद्र सरकार से डाटा संशोधन के लिए कृषि विभाग को किसानों की सूची भेजी जाती है। फिर कृषि व राजस्व विभाग के कर्मचारियों को लगाकर इन लाभार्थियों का सत्यापन कराने के साथ नए किसानों का आवेदन कराया जाता है। यह प्रक्रिया लगातार चल रही है। इस सबके बावजूद स्वर्ग सिधार चुके किसानों पर किसी का ध्यान नहीं जाता। इससे उनके खाते में सम्मान निधि की किस्त कई वर्ष बीतने के बाद भी जाती रहती है।
मरने के वर्षों बाद भी खाते में आती सम्मान निधि
गांव कनकापुर निवासी मुन्नी देवी की मई 2021 में मौत हो गई थी। तब से उनके खाते में सात किस्त के 14,000 रुपये भेजे जा चुके हैं। महमदपुर धनी निवासी जगदीश का अक्तूबर 2024 में निधन हो गया। इसके बाद खाते में किस्त के 6,000 रुपये भेजे गए। कोरीखेड़ा निवासी मृत मुंशीलाल के खाते में 6,000 रुपये, रौकरी निवासी श्रीपाल के खाते में 8,000 रुपये, कुइयांखेड़ा निवासी जय सिंह के खाते में 6,000 रुपये, जैतपुर निवासी प्रेम सिंह के खाते में 6,000 रुपये, जिठौली निवासी छोटी बेटी के खाते में 6,000 रुपये, कनासी निवासी बलवीर के खाते में 6,000 रुपये सम्मान निधि के भेजे जा चुके हैं।
इसके अलावा मंझना निवासी सियारानी, कुतुबुद्दीनपुर निवासी जिलेदार, बरखिरिया निवासी मायादेवी व भुसेरा निवासी रामकली के खाते में चार-चार हजार रुपये, खंडौली निवासी सावित्री देवी, कमलाईपुर निवासी वृंदावन, बहोरनपुर टप्पा हवेली निवासी रघुनंदन के खाते में मृत्यु के बाद दो-दो हजार रुपये भेजे जा चुके हैं।
खाता बंद होने पर खुद आ रहे परिजन
उपकृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि मृत किसान के खाता संचालन पर बैंक से ही रोक लग जाती है, तब परिजन पहले से जमा धनराशि निकालने के लिए सम्मान निधि की किस्त बंद कराने और मृत्यु के बाद पहुंची किस्तों की धनराशि जमा करने के लिए प्रार्थनापत्र दे रहे हैं। इससे उनकी रिकवरी भी आसानी से हो जाती है और विभाग से बैंक को पत्राचार कर परिजन को खाते में पहले से जमा धनराशि निकालने की अनुमति दी जाती है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की किस्त रुक रही है, उनका पोर्टल पर डाटा संशोधन कर भेजा जा रहा है।