फर्रुखाबाद। हाईकोर्ट ने तिहरे हत्याकांड में दो आरोपियों की फांसी की सजा रद्द कर दी। जेल में बंद दोनों आरोपियों को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए हैं। 17 वर्ष पहले अवैध संबंध के चलते तीन महिलाओं की हत्या की गई थी। सेशन कोर्ट से दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
शहर कोतवाली के मोहल्ला खटकपुरा निवासी शकील ने 26 जुलाई 2007 को तहरीर दी। इसमें बताया कि वह रिश्तेदार मोहम्मद कलीम, पत्नी यासमीन व मां नूरजहां, बहन नसरीन के साथ रहता है। अज्ञात बदमाशों ने यासमीन, नूरजहां, नसरीन की धारदार हथियार से गला काटा और गोली मारकर हत्या कर दी। कलीम को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। विवेचक ने मोहल्ला खटकपुरा निवासी कलीम व उसके चचेरे भाई मोहम्मद शकील, मोहल्ला चोबदारान निवासी लल्लन उर्फ लल्ला के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसमें कलीम के साली से अवैध संबंध के चलते हत्या करने का आरोप लगाया था। तत्कालीन ईसी एक्ट न्यायालय के न्यायाधीश राकेश कुमार ने गवाह व साक्ष्य के आधार पर मोहम्मद शकील व कलीम को फांसी की सजा सुनाई। एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया था। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा व अनीस कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने पूरे मामले में सुनवाई के बाद आरोपी शकील व कलीम की फांसी की सजा को रद्द कर दिया। दोनों आरोपियों को तत्काल जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं।