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Farrukhabad News: जेठ की जान बचाने के लिए बहू ने किया लिवर ट्रांसप्लांट

Tue, 17 Feb 2026 12:49 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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फोटो-14 दिल्ली के एक निजी अस्पताल मे भर्ती निदा परवीन। स्रोत: परिजन - फोटो : जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान मरीजों से बात करते मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप। स्रोत विभाग
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कंपिल। गांव निजामुद्दीनपुर की 29 वर्षीय निदा परवीन ने अपने जेठ अकबर की जान बचाने के लिए अपना लिवर दान कर एक अनूठी मिसाल पेश की है। अकबर पिछले आठ माह से लिवर खराब होने की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उन्हें जीवनदान के लिए लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी।
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इस कठिन घड़ी में जब निजामुद्दीनपुर गांव निवासी अकबर की पत्नी शिफा खान अपने आठ साल के बेटे अशरफ को लेकर मायके चली गई थीं, तब निदा परवीन पत्नी अमजद ने आगे बढ़कर अपने जेठ को बड़े भाई के समान माना और लिवर दान करने का फैसला लिया।

12 फरवरी को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में सफल ऑपरेशन के बाद निदा ने अपना लिवर अकबर को प्रत्यारोपित किया। यह कदम अत्यंत साहसिक और सराहनीय है, जिसने न केवल अकबर की जान बचाई, बल्कि पारिवारिक रिश्तों और मानवीय मूल्यों का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
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परिजनों के अनुसार, लिवर ट्रांसप्लांट के बाद से अकबर और निदा परवीन दोनों की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर बनी है। दोनों दिल्ली के निजी अस्पताल में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं और उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार देखा जा रहा है। इस घटना की क्षेत्र में व्यापक चर्चा है और लोग निदा परवीन को महादानी कहकर उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। यह घटना इंसानियत, त्याग और मजबूत पारिवारिक बंधनों का प्रतीक है।


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फोटो-14 दिल्ली क़े एक निजी अस्पताल मे भर्ती निदा परवीन। स्रोत: परिजन
फोटो-15 दिल्ली क़े एक निजी अस्पताल मे भर्ती अकबर। स्रोत: परिजन
- निजामुद्दीनपुर की महिला को लोग बता रहे महादानी
- दिल्ली के निजी अस्पताल में दोनों के स्वास्थ्य में हो रहा सुधार
संवाद न्यूज एजेंसी
कंपिल। गांव निजामुद्दीनपुर में एक महिला ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। उसने अपना लिवर दान कर अपने जेठ की जान बचा ली। लोग महिला को महादानी बताकर मामले की चर्चा कर रहे हैं। दोनों दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती हैं। वहां दोनों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।
गांव निजामुद्दीनपुर निवासी अकबर पिछले करीब आठ माह से गंभीर रूप से बीमार थे। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनका लिवर खराब होने की पुष्टि की और जीवन बचाने के लिए लीवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी। परिजन के अनुसार, बीमारी के दौरान अकबर की पत्नी शिफा खान उन्हें छोड़कर अपने मायके चली गई थीं और अपने 8 वर्षीय बेटे असरफ को भी साथ ले गईं। इससे परिवार और अधिक चिंतित हो गया था। इसी कठिन समय में अकबर के छोटे भाई अमजद की पत्नी निदा परवीन (29) आगे आईं। उन्होंने अपने जेठ को बड़े भाई के समान मानते हुए लिवर दान करने का फैसला लिया। निदा ने कहा कि उन्होंने इसे अपना कर्तव्य समझकर यह कदम उठाया।
12 फरवरी को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में सफल ऑपरेशन के बाद निदा परवीन ने अपना लीवर दान किया। इसके उसे अकबर के ट्रांसप्लांट किया गया। इससे उनकी जान बच गई। परिजन के मुताबिक, वर्तमान में दोनों की हालत स्थिर है और वे डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। यह घटना पूरे इलाके में इंसानियत, त्याग और पारिवारिक रिश्तों की एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।

फोटो-14 दिल्ली के एक निजी अस्पताल मे भर्ती निदा परवीन। स्रोत: परिजन- फोटो : जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान मरीजों से बात करते मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप। स्रोत विभाग

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