छड़ियों के साए में गुजरता शेख जी का डोला। संवाद न्यूज एजेंसी
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कमालगंज। ले चल पीर, नारे तकबीर, साहबे सज्जादा के उद्घोष और हाथों में छड़ी लेकर नंगे पैर दौड़ते मुरीदीन। यह नजारा था गुरुवार को उर्से मखदूम में छड़ियों के साथ दौड़ते जोश से भरे शेख मखदूम के अकीदतमंदों का। दोपहर बाद भोजपुर स्थित रूहानी आध्यात्मिक केंद्र चिल्लाहगाह से बेहोशी के आलम में सज्जादा नशीन की पालकी (डोला) छड़ियों के साए में दरगाहे मखदूमियां शेखपुर पहुंची। हजरत शेख मखदूम की मजार के पास सज्जादा नशीन के शरीर से खिरका शरीफ उतारने के बाद दफ बजाकर फारसी भाषा की रुबाई पढ़ी गई। होश में आने के बाद कुलशरीफ हुआ। सज्जादा नशीन ने देश में अमन व मुल्क की खुशहाली के लिए दुआएं खैर कीं।
हजरत शेख मखदूम बुर्राक लंगरजहां रहमतुल्लाह अलैह के 696वें उर्स-ए-मखदूम में गुरुवार को खिरका शरीफ (हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का लिवासे पाक) को बाद नमाजे जोहर छड़ियों की हिफाजत में शेखपुर दरगाह से भोजपुर चिल्लाहगाह ले जाया गया। खिरका शरीफ पहनते ही सज्जादा नशीन को बेहोशी आ गई। बेहोशी हालत में सज्जादा नशीन को लिटाकर छड़ियों के साए में अकीदतमंदों का काफिला शेखपुर दरगाह के लिए रवाना हुआ। सबसे आगे किशोर और युवाओं का काफिला कच्चे रास्ते से होते हुए बढ़ रहा था। कोई छड़ी को हाथ में ऊपर उठाए तो कोई जमीन पर छड़ी पटकता दौड़ रहा था। पूरे जोश के साथ ले चल पीर, नारे तकबीर, साहबे सज्जादा जिंदाबाद के नारे लग रहे थे।
कानपुर मार्ग पर शेखपुर रेलवे क्रासिंग होते हुए छड़ियों का काफिला दरगाहे मखदूमियां पहुंचा। डोले की रस्सियों को अकीदतमंद अपने कंधे पर रखे थे। दरगाह में सज्जादा नशीन हजरत अजीजुल हक गालिब मियां को शेख मखदूम की मजार शरीफ का तवाक कराया गया। अदब के साथ उनके शरीर से खिरका शरीफ उतारा गया। लतीफ कमालगंजवी ने दफ बजाकर रुबाई पढ़ी। इसके बाद सज्जादा नशीन होश में आए और कुल शरीफ हुआ। सज्जादा नशीन ने नेकी करने का संदेश दिया, दुआएं खैर कीं। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल उर्स मखदूम में अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। मेले में झूलों व दुकानों पर भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए दूसरे थानों की भी पुलिस लगी रही। पूर्व विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी के पुत्र अरशद जमाल सिद्दीकी, रामलीला कमेटी अध्यक्ष रवि दुबे, प्रधान कुलदीप कुशवाहा, दिलीप गुप्ता, बेबी शबीना प्रधान, मोहिसिन समशी, एहसानुल हक सोहरवर्दी, हस्सान अहमद सोहरवर्दी, संतोष प्रधान आदि भी व्यवस्था में रहे।