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अवैध कब्जेदार सगे भाइयों ने पुलिस से की हाथापाई

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अतिक्रमण हटाने का विरोध करने वाले भाइयों को पकड़ कर ले जाती पुलिस। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान अवैध बने मकान को तोड़ने पहुंची पुलिस व नगर पालिका की टीम के साथ कब्जेदारों ने हाथापाई कर दी। इससे हड़कंप मच गया। पुलिस ने भी बल प्रयोग कर कब्जेदार सगे भाइयों को गाड़ी में लादकर थाने पहुंचाया।
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इसके बाद अभियान चलाकर 32 अवैध कब्जे ध्वस्त किए गए। सिटी मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव ने बताया कि आरोपी भाइयों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने व मारपीट का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
फतेहगढ़ के जिला जेल चौराहे से लेकर पुलिस लाइन गेट तक मोहल्ला ग्रानगंज में बुधवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। पुलिस लाइन मार्ग पर अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम की 57.75 डिसमिल भूमि है। इस पर दशकों से अवैध कब्जे हैं। किसी ने अपने मकान बना लिए तो किसी ने दुकानें बनाकर उन्हें किराए पर उठा रखा है।
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बुधवार सुबह सिटी मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) रेनू, ईओ रविंद्र कुमार, लेखपाल, नगर पालिका की टीम व पुलिस फोर्स दो जेसीबी लेकर पहुंचीं और अभियान शुरू किया गया। सबसे पहले एक बसपा नेता की उन तीन दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया, जिन्हें उसने करीब 55 लाख रुपये में बेच दिया था।
जब अधिकारी व बुलडोजर मलिखान के मकान के सामने पहुंचे तो उनके पुत्र गुड्डू व मनोज ने खुद मकान तोड़ने की मोहलत मांगी। पिता की मौत के बाद सगे भाई मकान में ही किराने की दुकान चलाते हैं। अधिकारियों के मना करने पर टीम ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी।
इस पर घर की महिलाओं ने भी विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते अधिकारियों के सामने पुलिस व पालिका कर्मियों से हाथापाई शुरू हो गई। अवैध कब्जेदारों ने जब कोतवाल पर सरिया तान दी तो सिपाहियों ने भी दोनों भाइयों को घसीटकर गाड़ी में डाला और कोतवाली लेकर पहुंच गए।
इसके बाद बुलडोजर लगाकर भाइयों के अवैध रूप से बने दो मंजिला मकान का अवैध निर्माण ध्वस्त करा दिया गया। ईओ रविंद्र कुमार ने लोगों से कहा कि जिनका एक-दो मीटर अतिक्रमण शेष रह गया है, वे स्वयं हटा लें। अन्यथा जुर्माना के साथ उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
मलबा देख बिलखती रहीं महिलाएं
मलिखान का मकान ध्वस्त होने के बाद घर की महिलाएं मलबे को देखकर रोती-बिलखती रहीं। उन्हें यकीन नहीं था कि कल तक जो उनका आशियाना था, वह इस कदर मलबे में तब्दील हो जाएगा। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें कब्जा हटाने की मोहलत तक नहीं दी गई। मलिखान की पत्नी तो बेहोश हो गई।
न चली नेतागिरी व सिफारिश
अवैध कब्जेदारों ने सारे प्रयास कर लिए, किसी ने नेताओं तो किसी ने प्रभावशाली लोगों से फोन कराया। इसके बाद भी अवैध कब्जे बच न सके। गुड्डू और मनोज से कोतवाली मिलने पहुंचे क्षेत्र के अरविंद को भी पुलिस ने दोनों के साथ ही बैठा लिया।
बनने से पहले ही मलबा हुईं दुकानें
पुलिस लाइन गेट के पास एक महिला दीवान ने भी चार दुुकानों का निर्माण कराया था। उसका पति सेना में है। दुकानों में शटर लगने और रंगरोगन का काम शेष था। किराए पर उठाने की बात भी हो चुकी थी। इससे पहले दुकानों पर चमचमाता बोर्ड लगता, वे भी मलबे में तब्दील हो गईं।
प्रधानमंत्री आवास भी अतिक्रमण में
मोहल्ला ग्रानगंज निवासी रामसिंह की पत्नी मीना देवी को दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में आवास मिला था। इसका भी कुछ हिस्सा अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम की भूमि पर है। उक्त अवैध कब्जे को परिजन स्वयं ही तोड़ने में जुटे रहे। आवास स्वीकृत कैसे हुआ, यह सवाल भी खड़ा हो रहा है।
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