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प्रतिमा विसर्जन यात्रा में विवाद पर चले ईंट-पत्थर, 24 घायल

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तीर्थ स्थलीय श्रंगीरामपुर गंगा तट पर मंगलवार को फर्रुखाबाद, कन्नौज व मैनपुरी की लगभग 30 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। विश्रांतों के पास ब्रह्मचारी आश्रम के पास कुएं पर पानी पीने को लेकर दो विसर्जन यात्राओं में शामिल श्रद्धालुओं के बीच विवाद हो गया। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई। इसमें करीब 24 लोग घायल हुए।
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दशहरा पर विभिन्न क्षेत्रों से दुर्गा विसर्जन शोभायात्राओं के पहुंचने का सिलसिला दोपहर से शुरू हो गया था। ट्रैक्टर ट्रॉली व अन्य वाहनों से प्रतिमाएं लेकर श्रद्धालु श्रंगीरामपुर पहुंचते रहे। दोपहर बाद कन्नौज जनपद के सरैया से आई विसर्जन यात्रा में शामिल आठ-दस लोग विश्रांतों से कुछ दूरी पर स्थित कुएं पर पानी पी रहे थे।
इसी बीच रजीपुर के पास स्थित एक गांव से पहुंची विसर्जन यात्रा में शामिल कुछ युवक पानी पीने कुएं पर पहुंच गए। पहले पानी को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। इसी दौरान मामला मारपीट तक पहुंच गया।
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दोनों तरफ से लाठी-डंडे व पत्थर चलने लगे। इसमें लगभग 24 लोग घायल हो गए। पत्थर चलने से कई महिलाएं भी घायल हुईं। रजीपुर के पास स्थित गांव कालाझाला निवासी डॉ. अरविंद पुत्र प्रेमदास, शीला देवी पत्नी रावेंद्र ,बब्लू पुत्र सतीश चंद्र, सुनील पुत्र अमर सिंह, सुआलाल पुत्र जगन्नाथ, आलोक पुत्र द्वारिका प्रसाद, विपिन पुत्र अमर सिंह, रवि पुत्र राजेंद्र व कल्याण सिंह पुत्र रमेश आदि लहूलुहान अवस्था में किसी निजी अस्पताल में गए।
कुछ लोगों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। इसी बीच रास्ते से गुजर रही यूपी 100 पुलिस वहां पहुंची। कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे क्षेत्राधिकारी अमृतपुर राजवीर सिंह गौर व कार्यवाहक थानाध्यक्ष उदयवीर सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे।
यूपी 100 पुलिस को देख सरैया निवासी मारपीट करने वाले सभी वहां से सरक गए। क्षेत्राधिकारी अमृतपुर ने बताया कि जब वह वहां पहुंचे तो मामला शांत हो गया था।
गंगा की अविरलता व निर्मलता के लिए चलाई जा रही मुहिम की धज्जियां उड़ीं। भू-विसर्जन के बजाय गंगा की धारा में ही प्रतिमाएं विसर्जित कर दी गईं। गंगा में विसर्जन रोकने के लिए पुलिस भी तैनात नहीं थी।
इसके चलते तीन जिलों से आईं प्रतिमाएं बिना किसी रोकटोक के गंगा जल में प्रवाहित की जाती रहीं। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी की तैनाती होती तो जल विसर्जन पर रोक लग सकती थी। विवाद की स्थिति को भी रोका जा सकता था।
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