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डिग्री कॉलेजों में अयोग्य शिक्षक कर रहे बौद्धिक संपदा का निर्माण

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फर्रुखाबाद। महाविद्यालयों में विश्वविद्यालय से अनुमोदित योग्य शिक्षकों के स्थान पर बड़ी संख्या में गैर अनुमोदित अयोग्य शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इसकी शिकायत विश्वविद्यालय से लेकर शासन तक पहुंची है। इनका संज्ञान लेकर कुलसचिव ने स्व वित्तपोषी पाठ्यक्रमों वाले कालेजों के प्रबंधक व प्राचार्यों को पत्र जारी कर गैर अनुमोदित शिक्षकों से शिक्षण कराने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
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छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह की ओर से 15 जून को जारी पत्र से स्व वित्तपोषी पाठ्यक्रम संचालन वाले कालेज प्रबंधकों में हड़कंप है। कुलसचिव ने कहा है कि महाविद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता में सुधार के लिए शासन-प्रशासन से लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। बावजूद इसके कई समस्याएं आ रही हैं। कॉलेजों में पाठ्यक्रम गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्राचार्य व शिक्षकों के विश्वविद्यालय से अनुमोदन कराए गए हैं। विभिन्न स्तरों से महाविद्यालयों में गैर अनुमोदित शिक्षकों से शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। इससे शिक्षण गुुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए जुलाई में कॉलेज खुलने पर विषयवार शत प्रतिशत अनुमोदित शिक्षकों से ही शिक्षण कार्य कराया जाए। अनुमोदित शिक्षकों की उपस्थिति पंजिका बनाकर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
जुलाई में विवि टीम कॉलेजों में जाकर शिक्षकों का करेगी सत्यापन
कुलसचिव ने कहा है कि जुलाई में विश्वविद्यालय की टीम कॉलेजों में पहुंच कर शिक्षकों का सत्यापन करेगी। सभी अनुमोदित शिक्षक पढ़ाते न मिलने पर संबंधित कालेज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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प्रायोगिक कार्य कराने, पुस्तकालय व फर्नीचर की भी होगी जांच
- प्रायोगिक विषयों से संबंधित आवश्यक उपकरण व प्रयोगशाला सामग्री केमिकल आदि भी उपलब्ध होने चाहिए। छात्र-छात्राओं के लिए कॉमन रूम की सुविधा, पुस्तकालय में वर्तमान पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकें भी उपलब्ध होनी चाहिए। छात्र संख्या के अनुरूप पर्याप्त फर्नीचर व बिजली व्यवस्था भी देखी जाएगी। छात्र व छात्राओं के अलग शौचालय, रैंप व पेयजल सुविधा भी जरूरी है।
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जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थिति
- राजकीय महाविद्यालय -01, सरकारी सहायता प्राप्त - 07, स्ववित्तपोषी- 70
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