फर्रुखाबाद। विशेष अदालत एंटी डकैती के न्यायाधीश महेंद्र सिंह ने अपहरण कर हत्या करने के बाद शव को छिपाने के मुकदमे में एक आरोपी को दोषी पाकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 25 हजार रुपये जुर्माना किया है। दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव मझोला निवासी भूप सिंह के पुत्र सत्यवीर को दो जनवरी 1999 को गांव लखनपुर निवासी धर्मेंद्र सिंह, वीरपाल और गजेंद्र मुकदमे की तारीख के लिए घर से बुला ले गए थे। सत्यवीर घर नहीं लौट तो परिजन तलाश करने लगे। धर्मेंद्र सिंह व अन्य आरोपियों ने भी सत्यवीर के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी।
भूप सिंह ने धर्मेंद्र सिंह, वीरपाल व गजेंद्र के खिलाफ कायमगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 28 दिन बाद पुलिस ने धर्मेंद्र को पकड़ा और उसकी निशानदेही पर जहानगंज क्षेत्र में बहोरिकपुर स्थित काली नदी के पास गड्ढे से सत्यवीर की चप्पल और शॉल बरामद की। इसकी शिनाख्त सत्यवीर के चाचा जयवीर ने की थी। शव बरामद नहीं हुआ था।
पुलिस ने जांच के बाद तीनों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरनाथ सिंह, केके पांडेय, संजीव पाल ने दलीलें पेश कीं।
सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने आरोपी वीरपाल व गजेंद्र को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। आरोपी धर्मेंद्र को हत्या, अपहरण और साक्ष्य छिपाने के जुर्म में दोषी पाकर आजीवन कारावास की सजा और जुर्माने से दंडित किया है।