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25 साल पुराने गैंगस्टर के मुकदमे में अनुपम का अब बना वारंट

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कोर्ट में पेशी पर जाते बसपा नेता डॉ. अनुपम दुबे। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। 25 साल पुराने गैंगस्टर के मुकदमे में बसपा नेता डॉ. अनुपम दुबे का अब वारंट बना है। शुक्रवार को उसे मैनपुरी जेल से कड़ी सुरक्षा में लाकर विशेष अदालत गैंगस्टर में पेश किया गया। मधुमेह से ग्रसित होने पर सैफई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर की ओर से दिए गए भोजन चार्ट के अनुसार अनुपम को भोजन और दवा की व्यवस्था करने का आदेश कोर्ट ने मैनपुरी के जेल अधीक्षक को दिया है।
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वर्ष 1997 में फतेहगढ़ कोतवाली में तैनात रहे प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कन्नौज के थाना छिबरामऊ के गांव निगोही खास निवासी नेम कुमार दुबे उर्फ बिलैया और फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी अनुपम दुबे के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की थी।
उस समय जिले में गैंगस्टर के मुकदमे की सुनवाई के लिए कोर्ट नहीं थी। इससे मुकदमे की सुनवाई कानपुर नगर की गैंगस्टर कोर्ट में होती थी। वहां मुकदमा लंबित था। इससे उसकी एक बार भी कोर्ट में पेशी नहीं हुई।
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कानपुर नगर से अनुपम दुबे का मुकदमा स्थानांतरित होकर फर्रुखाबाद गैंगस्टर कोर्ट में आया तो पता चला कि इस मुकदमे में अनुपम दुबे का वारंट ही नहीं बना है। पुलिस की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र पर न्यायाधीश ने मैनपुरी जेल से अनुपम दुबे को तलब किया। उसे शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया। 25 साल पुराने गैंगस्टर मुकदमे में उसका वारंट बनाया गया।
आरोपी के अधिवक्ता जितेंद्र सिंह चौहान ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि अनुपम को मधुमेह की बीमारी है। मेडिकल कॉलेज सैफई के डॉक्टर ने भोजन और दवा चार्ट दिया है, जिसके आधार पर जेल में सुविधा उपलब्ध कराने की याचना की।
न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह प्रथम ने मैनपुरी जेल अधीक्षक को डॉक्टर की ओर से दिए गए भोजन व दवा चार्ट के आधार पर व्यवस्था करने का आदेश दिया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेज सिंह राजपूत ने बताया कि गैंगस्टर मुकदमे में 17 जून की तारीख आरोप तय करने के लिए लगाई गई है। नेम कुमार उर्फ बिलैया की मौत हो चुकी है।
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