फर्रुखाबाद। शीतगृह मालिक से एनओसी के नाम पर डेढ़ लाख रुपये लेने की शिकायत पर एएसपी ने जांच की। इसमें शीतगृह मालिक ने अग्निशमन को रुपये देने के बयान दिए। एएसपी ने जांच रिपोर्ट एसपी को सौंपी। डीजी के आदेश पर अग्निशमन अधिकारी की जिले से संबद्धता समाप्त कर मैनपुरी भेज दिया गया है।
शमसाबाद क्षेत्र के गांव नगला नान निवासी सत्यम दीक्षित ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री व शासन के आला अधिकारियों तक शिकायत की कि वह फायर फाइटिंग के उपकरणों की फिटिंग कई वर्ष से गैर जनपदों में भी कर रहे हैं। अग्निशमन अधिकारी आशीष वर्मा व मुंशी स्मृति कौशल एनओसी के नाम पर 35 प्रतिशत कमीशन का दबाव बनाते हैं। शीतगृह की एनओसी के लिए तीन लाख, इंटर व डिग्री कॉलेजों की एनओसी के लिए दो लाख व प्राइमरी स्कूल एक लाख, जबकि हॉस्पिटल की अनापत्ति के लिए पांच लाख रुपये कमीशन के मांगते हैं। इसके बाद उपकरणों के मानक भी मायने नहीं रखते। उन्होंने दस लाख 80 हजार रुपये में प्रहलाद नारायण अग्रवाल के शीतगृह में अग्निशमन सुरक्षा उपकरण लगाने का अनुबंध किया। 27 जनवरी को काम पूरा होने के बाद उन्होंने एनओसी के लिए आवेदन किया।
तीन फरवरी को अग्निशमन अधिकारी आशीष वर्मा ने सीएफओ को गुमराह कर फर्जी रिपोर्ट लगाकर खारिज कर दिया। उन्होंने दोबारा आवेदन किया। इसके बाद अग्निशमन अधिकारी ने शीतगृह मालिक को फोन कर बुलाया और कहा कि सत्यम दीक्षित का बचा हुआ भुगतान दो लाख रुपये उन्हें दे दो, वरना फिर पहले की तरह निरस्त कर देंगे। आखिरकार शीतगृह मालिक से डेढ़ लाख रुपये ले लिए। रिश्वत लेने की कॉल रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद है। आईजीआरएस पर आई शिकायत के बाद एसपी आरती सिंह ने प्रकरण की जांच एएसपी को सौंपी।
एएसपी अरुण कुमार सिंह ने 19 मार्च को जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें उन्होंने कहा कि पीएन कोल्ड स्टोरेज मालिक प्रहलाद नारायण अग्रवाल ने अग्निशमन अधिकारी आशीष वर्मा को डेढ़ लाख रुपये देने की बात अपने बयान में कही है। हालांकि पुष्टि के लिए कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। उन्होंने अग्निशमन अधिकारी की भूमिका संदिग्ध बताते हुए जिले से संबद्धता समाप्त करने की संस्तुति की। अग्निशमन अधिकारी सुभाष चौधरी ने बताया कि डीजी के आदेश पर अग्निशमन अधिकारी आशीष वर्मा की संबद्धता समाप्त कर मैनपुरी के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया है।