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अंधविश्वास ने ली बालक की जान

Sun, 05 Jun 2016 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो फर्रुखाबाद
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बीमारी से ग्रस्त परवीना। - फोटो : अमर उजाला
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इक्कीसवीं सदी में भी लोग अंधविश्वास से उबर नहीं पा रहे हैं। भूत-प्रेत और झाड़-फूंक में अभी भी उनका भरोसा बना है। इसी अंधविश्वास के चलते क्षेत्र में एक बालक की जान चली गई जबकि चार लोग अभी भी मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव देवरैया में एक ही परिवार के पांच लोग धीरे-धीरे कर मानसिक रोग का शिकार होते गए और अशिक्षा व अंधविश्वास के चलते पिता ओझा से झाड़-फूंक कराता रहा। नतीजतन झाड़-फूंक और इलाज के दौरान एक बालक की मौत हो गई। बालक की मौत के बाद शेष चार मानसिक रोगियों की हालत और बिगड़ गई तो उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।

खुशीराम की पुत्री सुहागा (17) 15 दिन पहले मानसिक रोग चपेट में आ गई। खुशीराम ने किशोरी को किसी चिकित्सक के पास न ले जाकर ओझा से झाड़-फूंक कराता रहा। इसी दौरान दो-तीन दिन के अंतराल में सुहागा की छोटी बहन सोनम (16) भी मानसिक रोग से ग्रस्त हो गई। पिता का अंधविश्वास दूसरी बेटी के पीड़ित होने पर और बढ़ गया। वह ओझा से ही झाड़-फूंक व इलाज कराता रहा।
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ओझा के इलाज के चलते उसका बेटा धीरज (22) भी मानसिक रोगी हो गया और इसके बाद परवीना (14) और शिवम (12) भी इस रोग की चपेट में आ गए। देखते-देखते उसका घर मानसिक रोगियों से भर गया। खुशीराम के पांच बच्चे थे। पांचों मानसिक रोग का शिकार हो गए। दूसरी तरफ ओझा के झाड़-फूंक के बाद शिवम ने शनिवार को अपने पैरों में दर्द बता चीखना-चिल्लाना शुरू किया। देर शाम उसके पैर पीले पड़ गए और रविवार भोर उसकी मौत हो गई।

शिवम की मौत के बाद उसका मामा रामकिशोर वहां पहुंचा तो चारों बच्चे पागलों की तरह हरकतें कर रहे थे। वह इन्हें आनन-फानन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया। वहां इनका उपचार जारी है। डा. शिवप्रकाश का कहना है कि यह बच्चे मानसिक रोग से पीड़ित हैं। इन्हें वाजिब इलाज नहीं मिला। इस वजह से इनकी हालत गंभीर होती गई। कुछ समय इलाज के बाद इनके ठीक होने की संभावना है।
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